Saturday, February 21, 2026

परीक्षा के तनाव में जी रहे विद्यार्थी शादियों में बज रहा कानफोड़ू डीजे


अशोक मिश्र

हरियाणा में जहां वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है, वहीं ध्वनि प्रदूषण भी कम परेशान करने वाला नहीं है। सड़कों पर तेज हार्न बजाकर दौड़ती हुई गाड़ियां सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण पैदा करती हैं। हरियाणा में विशेषकर गुरुग्राम, फरीदाबाद और रोहतक जैसे शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण का स्तर खतरनाक है, जो अक्सर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों (दिन में 55 डेसिबल से कम) से काफी ऊपर रहता है। इन दिनों शादियों का मौसम है। 

रात में निकलने वाली बारात के दौरान बजने वाले डीजे लोगों को काफी परेशानी में डाल रहा है। उच्च रक्तचाप की बीमारी से ग्रसित लोगों के हृदय में डीजे बजते समय कांपने लगते हैं। आसपास की इमारतों में कंपन पैदा होने लगता है। कई बार तो ऐसा महसूस होता है कि यदि तनिक भी डीजे का शोर अधिक हुआ, तो इमारत भरभरा कर गिर जाएगी। राज्य के औद्योगिक शहरों में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है। 

ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्रोत वाहनों का हॉर्न, निर्माण कार्य और जनरेटर के साथ-साथ शादियों में बजने वाले डीजे हैं। ध्वनि प्रदूषण पर नजर रखने के लिए तो फरीदाबाद में पहले वास्तविक-समय ध्वनि निगरानी स्टेशन स्थापित किए गए हैं। वैसे तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग अलग मानक तय किए हैं, लेकिन इन मानकों का उल्लंघन हर जगह होता दिखाई दे जाएगा। बोर्ड के नियमानुसार, अस्पतालों के आसपास दिन में 50 डेसिबल और रात में 40 डेसिबल से कम ही शोर होना चाहिए ताकि मरीजों की नींद में किसी प्रकार का खलल न पड़े, लेकिन आमतौर पर ऐसा होता नहीं है। 

गाड़ियों के हॉर्न बजते रहते हैं। डीजे वाले भी अस्पताल का ध्यान नहीं रखते हैं। कुछ ही दिनों में राज्य में बोर्डों की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। इसके बाद नौवीं और ग्यारहवीं की परीक्षाएं होंगी। छोटे बच्चों की भी परीक्षाएं निकट भविष्य में होनी हैं। बच्चे तनाव में हैं। जल्दी से जल्दी कोर्स पूरा करने का उन पर दबाव भी है। वह अधिक से अधिक समय तक पढ़ाई करना चाहते हैं। लेकिन उनके आसपास होने वाला शोर उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है। बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं। 

ध्वनि प्रदूषण के चलते उनकी मानसिक शांति खत्म हो रही है। उनमें हाईपर टेंशन, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन बढ़ता जा रहा है। कई बार तो तनाव में वह उग्र भी हो रहे हैं। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि तेज आवाज वाले डीजे या हाई डेसिबल वाली ध्वनि केवल कानों के पर्दे को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि दिल के रोगियों के लिए कई बार जानलेवा हो जाती है। अचानक तेज आवाज होने से शरीर स्ट्रेस रिस्पांस सक्रिय करके एड्रेनॉलिन बढ़ाता है जिसकी वजह से धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे लोगों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।

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