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Tuesday, April 14, 2026

कलेक्टर अलेक्जेंडर हेमिल्टन की अनदेखी की


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बंगाल में नवजागरण के अग्रदूत थे राजा राममोहन राय। वह अंग्रेजी शिक्षा के भले ही समर्थक रहे हों, लेकिन उन्होंने भारतीयता को हमेशा सर्वोच्च शिखर पर रखा। राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 में बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह एक पत्रकार और समाज सुधारक के रूप में विख्यात थे। 

उन्होंने बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि का उन्होंने भरपूर विरोध किया। उनके प्रयास करने से ही बंगाल में थोड़ी बहुत जागरूकता आई थी। उनके अथक प्रयासों से, तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने 1829 में सती प्रथा को आधिकारिक तौर पर गैरकानूनी घोषित कर दिया था। 

एक बार की बात है। राजा राममोहन राय पालकी पर बैठकर कहीं जा रहे थे। उसी रास्ते में वहां का कलेक्टर  अलेक्जेंडर हैमिल्टन खड़ा था। राय ने उसे देखा, लेकिन उन्होंने पालकी से उतरने की जरूरत नहीं समझी। इससे कलेक्टर हैमिल्टन को बहुत गुस्सा आया। उसने सिपाहियों को भेजकर पालकी को रुकवा दिया। उसने राजा राममोहन राय को काफी भला बुरा कहा। 

इसके बाद राय ने कलेक्टर का लगभग निरादर करते हुए पालकी में जाकर बैठ गए और अपने गंतव्य की ओर चले गए। राजा राम मोहन राय को अंग्रेजों की भेदभाव वाली नीति बहुत बुरी लगती थी। कलेक्टर अलेक्जेंडर की शिकायत उन्होंने लार्ड मिंटो से की। लार्ड मिंटो ने कलेक्टर को आगे से राजा राममोहन राय के साथ ऐसा व्यवहार न करने की चेतावनी दी। 

इसके बावजूद राजा राममोहन राय अंग्रेजों की भेदभाव नीति के खिलाफ आवाज उठाते रहे। अंतत: ब्रिटिश हुकूमत को अपनी भेदभाव नीति को त्यागना पड़ गया।