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Monday, March 2, 2026

तुम किसी और की मदद कर देना


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जरूरत के समय किसी की मदद करना और उसे भूल जाना सज्जन व्यक्ति का काम है। इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग जीवन में कभी न कभी मिल जाते हैं जो लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। लेकिन ऐसे लोग बहुतायत में मिलेंगे जो किसी की मदद करने के बाद लोगों के बीच चर्चा करते रहते हैं कि अमुक व्यक्ति की उन्होंने संकट के समय सहायता की थी। 

फ्रैंकलिन बेंजामिन एक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ प्रकाशक थे। वह संपादक होने के साथ-साथ राजनेता और राजनयिक भी थे। उन्हें अमेरिका का संस्थापक होने के भी सौभाग्य हासिल हुआ था। वह अमेरिका के अमीर लोगों में से एक थे। उनका बचपन काफी संकटों में बीता था। जब वह अपने जीवन के शुरुआती दिनों में संकट में थे, तो उन्होंने अपने एक मित्र से कुछ मुद्राएं उधार ली थीं। 

उन दिनों वह एक समाचार पत्र प्रकाशित कर रहे थे। बीमार पड़ जाने की वजह से कई दिनों तक उनका अखबार नहीं निकला था। अखबार से भी बहुत ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने मित्र से उधार मांगने की नौबत आ गई थी। उनके मित्र ने उनकी भरपूर मदद भी की थी। इस बात को काफी दिन बीत गए। एक दिन वह अपने मित्र के पास गए और उसके सामने कुछ मुद्राएं रखकर बोले, मित्र, यह रही तुम्हरी रकम। मित्र ने पूछा, किस बात की रकम।

 फ्रैंकलिन ने कहा कि एक बार मैंने आपसे कुछ मुद्राएं उधार ली थीं। अब मेरे पास पैसा है, तो आपकी रकम लौटाना चाहता हूं। उन्होंने पूरी घटना बताई। तब उनके मित्र ने कहा कि यह रकम तुम अपने पास रखो। जब तुम्हें कोई जरूरतमंद मिल जाए तो तुम उसकी मदद कर देना और रकम वापस मत मांगना। फ्रैंकलिन ने बाद में ऐसा किया भी, लोगों की भरपूर मदद की।