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Tuesday, March 31, 2026

विसेंट वैन गॉग जिसे मरने के बाद सराहा गया

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अपने जीवन की अंतिम सांस लेने के समय ‘दुख हमेशा रहेगा’ कहने वाले डच चित्रकार विसेंट वैन गॉग को जीवन भर वह नहीं मिला जिसके वह हकदार थे। मृत्यु के कई वर्षों बाद जब उनकी प्रतिभा को लोगों ने पहचाना और उन्हें अपने समय का महानतम चित्रकार माना। 

30 मार्च 1853 में नीदरलैंड्स में जन्मे वैन गॉग को बचपन से ही चित्रकला में रुचि थी। उनके परिवार के कई लोग कला से संबंधित व्यवसाय करते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन में कई तरह के काम किए। कई वह आर्ट डीलर बने जो उनके परिवार के दादा, चाचा आदि करते थे। 

निराशा के क्षणों में उन्होंने पादरी बनने का फैसला किया, लेकिन इस काम में भी वह विफल ही रहे। वैसे वैन गॉग का जन्म एक अमीर परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा उनकी मां की देखरेख में हुई थी। लेकिन वह अपने परिवार से जीवन भर लगभग कटे से रहे। एकाकी जीवन जीने की वजह से वह अस्थिर दिमाग वाले हो गए थे। कुछ लोग तो उन्हें मनोरोगी समझते थे। 

जब वह 27 साल के हुए, तो उन्होंने मुकम्मल तौर पर तय किया कि अब उन्हें चित्रकार ही बनना है। उन्होंने चित्र बनाना शुरू किया, लेकिन लोग उनके चित्रों के प्रति उदासीन ही रहते थे। वह अपने जीवन में केवल एक ही चित्र बेचने में सफल हो पाए थे। 

एक दशक से कुछ अधिक समय में, उन्होंने लगभग 2,100 कला कृतियाँ बनाईं, जिनमें लगभग 860 तैलचित्र थे, जिनमें से अधिकांश उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दो वर्षों में बनाईं। एक बार उन्होंने अपने को गोली मार ली। गोली उनकी रीढ़ की हड्डी में फंस गई। अस्पताल में ही 29 जुलाई 1890 में 37 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई।