Showing posts with label #बिजली खपत #गर्मी #हरियाणा सरकार #वार्षिक राजस्व #पारदर्शी. Show all posts
Showing posts with label #बिजली खपत #गर्मी #हरियाणा सरकार #वार्षिक राजस्व #पारदर्शी. Show all posts

Friday, March 27, 2026

घाटा सहने के बावजूद बिजली की दरों में बढ़ोतरी न करने का फैसला सराहनीय


अशोक मिश्र

मार्च का महीना बीतने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। अभी से ही गर्मी अपना प्रभाव दिखाने लगी है। अप्रैल से जून-जुलाई तक प्रचंड गर्मी पड़ने के आसार हैं। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि हरियाणा में बिजली की खपत बढ़ेगी। खपत बढ़ने से उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम पर बिजली खपत में संतुलन बनाए रखने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी। 

सामान्य दिनों की अपेक्षा गर्मी के दिनों में बिजली की खपत पढ़ जाती है, यह सर्वमान्य नियम है क्योंकि गर्मी के दिनों में पंखा और एसी यानी वातानुकूलन यंत्र लगभग हर घर में चलाया जाता है। एसी और पंखों को चलाने से बिजली खपत की दर आसमान छूने लगती है। ऐसी स्थिति में कई बार स्थानीय बिजली विभाग प्रशासन को  कई प्रकार की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। एक आंकड़े के  अनुसार प्रदेश के 83.79 लाख उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं को गर्मी के दिनों में अबाधित बिजली सप्लाई कर पाना, एक बड़ी चुनौती होती है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम गर्मियों में किसी तरह हालात को बेहतर बनाए रखने का प्रयत्न करते हैं। 

इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हरियाणा सरकार ने इस बार बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है जो प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने यह निर्णय उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की ओर से दायर वार्षिक राजस्व आवश्यकता याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के बाद लिया है। इससे दोनों डिस्कॉम्स को लगभग 4,484.71 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान है। 

इतना बड़ा घाटा सहने के बावजूद बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी न करना, प्रदेश सरकार की सराहनीय पहल ही कही जाएगी। इससे पहले हरियाणा में बिजली की दरें अप्रैल 2025 में बढ़ाई गई थीं। इतना ही नहीं, आयोग ने बिजली क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं। हरियाणा पावर परचेज सेंटर के पुनर्गठन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि बिजली खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और किफायती बन सके। साथ ही, डिमांड साइड मैनेजमेंट उपायों के माध्यम से मांग में उतार-चढ़ाव को संतुलित करने पर भी जोर दिया गया है। 

वर्तमान में अधिकतम और न्यूनतम मांग के बीच लगभग तीन हजार से पांच हजार मेगावाट का अंतर है। आयोग ने कृषि क्षेत्र के लिए 7,870.32 करोड़ रुपये की राज्य सरकार सब्सिडी का प्रावधान रखा है। इसके तहत किसानों को 7.48 रुपये प्रति यूनिट की वास्तविक लागत के मुकाबले केवल 0.10 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा, जिससे कृषि उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।