Showing posts with label #युद्ध #यूरोपीय संसद #आइरीन मोंटेरो #अमेरिका. Show all posts
Showing posts with label #युद्ध #यूरोपीय संसद #आइरीन मोंटेरो #अमेरिका. Show all posts

Monday, March 30, 2026

युद्ध का इतना ही शौक है, तो अपने बेटे को भेजो लड़ने

संजय मग्गू

एसी कमरों में बैठकर 'युद्ध' का फैसला करना दुनिया का सबसे आसान काम है, क्योंकि वहां जान किसी और के बेटे की जाती है। यह एक कटु सत्य है। अभी हाल ही में इस कटु सत्य को उजागर किया है यूरोपीय संसद में स्पेन की आइरीन मोंटेरो ने। जब ट्रंप नाटो देशों से ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने की अपील कर रहे थे, उसी दौरान यूरोपीय संसद में स्पेन की नेता, वामपंथी विचारक और महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली आइरीन मोंटेरो गरज रही थीं और उन राष्ट्राध्यक्षों को ललकार रही थीं जो युद्ध की हिमायत कर रहे थे। उन्होंने सीधे डोनाल्ड ट्रंप को घेरे में लेते हुए यहां तक कहा कि अगर ट्रंप को जंग का इतना ही शौक है, तो वे खुद मैदान में उतरें और अपने बेटों को फ्रंट लाइन पर भेजें। 

यह एक कटु सत्य है। मोंटेरो का यह बयान उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों के मुंह पर एक करारा तमाचा है जो दूर बैठकर युद्ध की घोषणा करते हैं, सैनिकों को मरने के लिए युद्ध की आग में झोंक देते हैं। जैसे ही अपनी जान पर खतरा दिखता है, बंकरों में जाकर छिप जाते हैं। इन दिनों कई देशों के बीच युद्ध चल रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चलने वाले युद्ध में हजारों सैनिक अब तक मारे जा चुके हैं। 

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले एक महीने से चल रहे युद्ध में किसको अपनी जान गंवानी पड़ी है? ईरान में तो वहां के सुप्रीम लीडर सहित सैन्य अधिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, लेकिन क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या फिर बेंजामिन नेतन्याहू के परिवार से किसी को युद्ध में अपनी जान गंवानी पड़ी। नहीं। यह दोनों देश हमलावर हैं, ईरान हमला झेलने वाला देश है। युद्ध ईरान ने नहीं शुरू किया था। इसलिए एक तरह से युद्ध उसकी ही भूमि पर लड़ा जा रहा है। 

ऐसी स्थिति में उसे नुकसान होना स्वाभाविक है। जब भी कहीं किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो इन युद्धों में मरने वाले गरीब मां-बाप के बेटे यानी सैनिक ही होते हैं। दुनिया भर के युद्धों का इतिहास खंगाला जाए, तो यही सिस्टम देखने को मिलेगा। राजा-महाराजा अपने महल में रंगरलियां मना रहा होता था, उनकी फौज के सिपाही अपने राजा के प्रति वफादारी निभाने के लिए अपनी जान न्यौछावर कर रहा होता था। 

दूसरों के बच्चों को युद्ध की आग में झोंक देने वाले राजा-महाराजा अपने को वीर बताते थे, लेकिन वास्तव में वह कायर ही होते थे। जिस दिन दुनिया के हर राष्ट्राध्यक्ष की औलादें सीमा पर बंदूक थामकर खड़ी होंगी, उसी दिन दुनिया के सारे विवाद बातचीत की मेज पर सुलझ जाएंगे। अगर ट्रंप, नेतन्याहू, पुतिन और ब्लादिमीर जेलेंस्की के बेटे-बेटियां हाथों में बंदूक लेकर लड़ने गए होते, तो यह  युद्ध पहले ही दिन खत्म हो गया होता। 

सत्ता के नशे में चूर राष्ट्रहित का नारा देने वाले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सांसद, नेता के सामने अपने बेटे-बेटियों को युद्ध के समय बार्डर पर भेजने की बाध्यता हो, तो कितने देशों के सत्ताधीश युद्ध के पक्ष में खड़े होंगे? शायद एक भी नहीं। सब शांति दूत बन जाएंगे।