Showing posts with label #विश्व तपेदिक दिवस #उन्मूलन #कार्यक्रम #औद्योगिक नगरी #टीबी मुक्त. Show all posts
Showing posts with label #विश्व तपेदिक दिवस #उन्मूलन #कार्यक्रम #औद्योगिक नगरी #टीबी मुक्त. Show all posts

Wednesday, March 25, 2026

सामूहिक प्रयास से ही हरियाणा हो सकता है तपेदिक मुक्त राज्य


अशोक मिश्र

आज विश्व तपेदिक दिवस पर पूरे देश में टीबी उन्मूलन को लेकर अभियान चलाए गए। लोगों को जागरूक किया गया। उन्हें यह समझाने का प्रयास किया गया कि तपेदिक एक गंभीर रोग है, इससे पीड़ित होने पर इलाज ही इसका बचाव है। यदि समय पर रोग का पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव है और मरीज का जीवन बचाया जा सकता है। हरियाणा में भी आज लगभग सभी जिलों में लोगों को जागरूक करने के लिए सेमिनार, कार्यशालाएं और विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए। 

इसके बावजूद अभी तक हरियाणा को तपेदिक मुक्त नहीं किया जा सका है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। राज्य के सभी जिलों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। औद्योगिक नगरी के नाम से जाने जाने वाले जिलों में दूसरे राज्यों से कामगारों का आना और उनका अस्वास्थ्यकर वातावरण में रहना, तपेदिक रोग का सबसे बड़ा कारण कारण है। 

राज्य के लगभग हर जिले में शहरी क्षेत्र का विस्तार होता जा रहा है, इसके साथ झुग्गी-झोपड़ियों का भी विस्तार होता जा रहा है। दूसरे राज्यों से आए ज्यादातर मजदूर इन्हीं झुग्गी-झोपड़ियों में शरण लेते हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां जब तपेदिक रोगियों का पता लगाने के लिए अभियान चलाती हैं, तो पता लगता है कि इनमें से कई मजदूर टीबी के मरीज निकल आते हैं। 

ज्यादातर मामलों में होता यह है कि यह मजदूर एक जगह टिकते नहीं हैं। टीबी का कोर्स भी पूरा नहीं करते हैं। जबकि टीबी का इलाज लंबा चलता है और एक दिन भी दवा लेने में नागा नहीं किया जा सकता है। ऐसे लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं जिससे बाद में जब परेशानी बढ़ जाती है, तो यह लोग फिर अस्पताल की ओर रुख करते हैं, तब दवा लेने की मियाद काफी बढ़ जाती है। इन सब परेशानियों के बावजूद राज्य सरकार अपने पूरे दमखम के साथ तपेदिक उन्मूलन के अभियान में लगी हुई है। 

मार्च महीने में ही राज्य सरकार ने एक आंकड़ा जारी किया था जिसके मुताबिक हरियाणा की 2157 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है। इनमें से 211 पंचायतों को स्वर्ण, 646 पंचायतों को रजत तथा 1300 पंचायतों को कांस्य श्रेणी में प्रमाणपत्र मिला है। राज्य में कुल 6237 पंचायतें हैं। इस तरह लगभग 35 प्रतिशत पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं। अंबाला टीबी मुक्त 191 पंचायतों के साथ अभियान में सबसे आगे है। 

पिछले तीन वर्षों में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस कार्यक्रम के जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन को दर्शाती  है। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 88,689 टीबी के मामले दर्ज किए गए हैं जिसमें 74,483 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। ऐसी स्थिति में लोगों को भी चाहिए कि वह लगातार खांसी आने पर अपनी जांच कराएं और हरियाणा को तपेदिक मुक्त बनाने में सहयोग करें।