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Friday, April 3, 2026

राजा ने युवराज को दिया देश निकाला


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

एक सच्चा न्यायाधीश या राजा वही होता है, जो किसी मामले में फैसला करते समय अपना पराया नहीं देखता है। न्याय जल्दी और सच्चा होना चाहिए। एक समय की बात है। किसी राज्य का राजा अपनी प्रजा के बीच काफी लोकप्रिय था। वह अपनी प्रजा की भलाई के लिए हमेशा कुछ न कुछ करने को तैयार रहता था। 

एक दिन की बात है। उसके दरबार में कुछ लोग उससे मिलने आए। उसने उन लोगों को बड़े आदर के साथ बिठाया। उन्हें जलपान कराया। इसके बाद उसने पूछा कि आप लोग किस वजह से मुझसे मिलने आए हैं। एक व्यक्ति यह बात सुनते ही रो पड़ा। राजा ने उस रोते हुए व्यक्ति से कहा कि आप मुझे बताइए कि मेरे राज्य में आपको किस प्रकार का कष्ट है। 

मैं आपके कष्ट को दूर करने का हरसंभव प्रयास करूंगा। राजा की बात सुनकर एक बुजुर्ग ने कहा कि महाराज! अब आपसे क्या कहूं। युवराज के कार्यों से राज्य के काफी लोग दुखी हैं। परेशान हैं। बुजुर्ग की बात सुनकर राजा ने पूछा कि युवराज ऐसा क्या करते हैं जिसकी वजह से हमारी प्रजा को दुख होता है। 

उस बुजुर्ग ने कहा कि महाराज! रोज शाम को युवराज नदी के किनारे जाकर बैठ जाते हैं। उधर से गुजरने वाले छोटे बच्चों को नदी में फेंककर अपना मनोरंजन करते हैं। बच्चे जब बचाने के लिए चिल्लाते हैं, वह हंसते हैं। काफी बच्चे डूबकर मर गए हैं। राजा ने कहा कि आप लोग घर जाइए, कल से ऐसा नहीं होगा। 

राजा जब राजमहल पहुंचा, तो उसने युवराज को बुलाया और कहा कि तुम्हें डूबते बच्चों को देखकर खुशी मिलती है। तुम युवराज रहने के लायक ही नहीं हो। भय से कांपते हुए युवराज ने दोबारा ऐसा करने का वचन दिया, लेकिन राजा नहीं माने और युवराज को देश निकाला दे दिया।