Friday, February 27, 2026

सज्जन की उपाधि खरीदी या बेची नहीं जा सकती

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

दुनिया के इतिहास में एक ऐसा भी राजा हुआ है जिसने उपाधियां पैसे लेकर बांटी थी। ऐसे राजा का नाम है जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट। इनका जन्म  सन 1566 में हुआ था। स्टुअर्ट एक लेखक भी थे। उन्होंने डेमोनोलॉजी (1597) और बेसिलिकॉन डोरॉन (1599) जैसी रचनाएँ लिखीं। उनके द्वारा प्रायोजित बाइबिल का अंग्रेजी अनुवाद 'किंग जेम्स संस्करण' के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 

एलिजाबेथ प्रथम के निधन के बाद उन्हें राजगद्दी मिली थी, लेकिन बाद में वह स्कॉटलैंड, ब्रिटेन और आयरलैंड के शासक बने। तभी से उन्होंने अपने को ग्रेट ब्रिटेन का राजा कहना शुरू किया। यह तो सभी जानते हैं कि शासन व्यवस्था चलाने के लिए काफी धन की जरूरत होती है। 

राजकोष का धन बढ़ाने के लिए उन्होंने कई उपाय किए, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसलिए उन्होंने लोगों से मोटी रकम लेकर उपाधियां बांटनी शुरू की। उन्होंने बहुत सारे लोगों को लॉर्ड, ड्यूक, प्रिंस जैसी तमाम उपाधियां पैसे लेकर बांटी। वह इस बात को अच्छी तरह जानते थे कि इन उपाधियों को हासिल करने वाला व्यक्ति समाज में अपने अहंकार को तुष्ट करना चाहता है। 

उपाधि हासिल कर लेने से कोई महान नहीं हो जाता है। एक दिन वह दरबार मं बैठे तो एक आदमी ने आकर उनसे कहा कि  उसे सज्जन की उपाधि चाहिए। इसके लिए चाहे जितनी रकम खर्च करनी पड़े। स्टूअर्ट ने कहा कि मैं तुम्हें राजवंश से जुड़ी उपाधियां दे सकता हूं। तुम्हें लॉर्ड बना सकता हूं, ड्यूक बना सकता हूं, लेकिन सज्जन की उपाधि नहीं दे सकता हूं क्योंकि सज्जनता खरीदी या बेची नहीं सजा सकती है। इसे अपने कर्म और व्यवहार से कमाना पड़ता है। वह आदमी निराश होकर चला गया।

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