Wednesday, February 25, 2026

ब्राह्मण की मदद करने को खतरे में डाला जीवन


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

छत्रपति शिवाजी में युद्ध नीति बनाने की असाधारण प्रतिभा थी। उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। उनके पिता शाहजी राजे भोसले एक शक्तिशाली सामंत परिवार में जन्मे थे। शाहजी राजे की दो पत्नियां थीं। शिवाजी की माता जीजाबाई ने ही अपने पुत्र का पालन-पोषण किया था। 

बचपन से ही जीजाबाई ने अपने बेटे को युद्ध और रणनीति बनाने की शिक्षा दी थी। यह उस युग की मांग थी। शिवाजी का 1674 में रायगढ़ में राज्याभिषेक हुआ और छत्रपति की उपाधि धारण की थी। उन्होंने मुगल सम्राट औरंगजेब से कई लड़ाइयां लड़ी थीं। एक बार की बात है। मुगलों की सेना से बचने के लिए वह वेष बदलकर गांव-गांव घूम रहे थे। 

एक दिन वह एक ब्राह्मण के यहां रहने गए। ब्राह्मण काफी गरीब था। उसको अपना और अपने परिवार के लिए भोजन जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन उसने शिवाजी को प्रतिदिन भरपेट भोजन कराया। कई दिनों तक वह खुद भूखा रहा। जब यह बात शिवाजी को पता चली, तो उन्हें बहुत दुख हुआ। वह सोचने लगे कि इस ब्राह्मण की कैसे मदद की जाए। उन्होंने वहां के एक मुगल सूबेदार को पत्र लिखा कि इस ब्राह्मण के घर में शिवाजी छिपे हुए हैं। 

शिवाजी को गिरफ्तार कर लो, लेकिन इस ब्राह्मण को दो हजार अशर्फियां दे दो। मुगल सूबेदार ने दो हजार अशर्फियां देने के बाद शिवाजी को गिरफ्तार कर लिया। जब यह बात ब्राह्मण को पता चली तो वह फूटफूटकर रोने लगा। उसी दिन तानाजी ने हमला करके शिवाजी को कैद से छुड़ा लिया। इस तरह अपना जीवन खतरे में डालकर भी शिवाजी ने ब्राह्मण की मदद की। लोगों की मदद करने में शिवाजी हमेशा आगे रहते थे।

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