Friday, December 19, 2025

अपनी गरिमा के अनुरूप आचरण नहीं करते शिक्षक


अशोक मिश्र

अध्यापक को भगवान से भी बड़ा दर्जा हमारे समाज में दिया गया है।  अध्यापक ही बच्चों को पढ़ा-लिखाकर एक सभ्य नागरिक बनाता है। सदियों से हमारे देश में अध्यापक ही समाज के प्रेरणास्रोत रहे हैं। हमारे देश के हजारों महापुरुषों और अवतारों ने गुरु की महिमा का बखानी है। जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन्होंने अपने जीवन को सुधारने और महान बनाने में शिक्षक की भूमिका का बड़े गर्व के साथ उल्लेख किया है। वैसे भी दुनिया के हर समाज में शिक्षक को उच्च स्थान दिया गया है। लेकिन जब यही शिक्षक अपनी गरिमा के अनुरूप आचरण नहीं करते हैं, तो काफी दुख होता है। 

फरीदाबाद की जवाहर कॉलोनी स्थित सारण गांव के सरकारी स्कूल में गणित विषय के अध्यापक ने स्कूल बंक करने पर एक छात्र की बुरी तरह पिटाई की। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक बच्चे द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें शिक्षक दो बच्चों की सहायता से बंक करने वाले छात्र के तलवों पर डंडों से बुरी तरह पिटाई कर रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले को स्वत:संज्ञान में लिया है। यही नहीं, प्रदेश में आए दिन कोई न कोई ऐसी घटना जरूर प्रकाश में आ जाती है जिससे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो जाते हैं। इसी साल 22 अगस्त की बात है। 

पानीपत के जाटल स्थित एक निजी स्कूल में सात वर्षीय बच्चा होमवर्क करने नहीं लाया, तो प्रिंसिपल ने पहले उस बच्चे को खुद सजा दी। बाद में उस बच्चे को बस ड्राइवर को सौंप दिया। ड्राइवर ने बच्चे को ऊपर ले जाकर उल्टा लटका दिया और बुरी तरह पिटाई की। मामला खुला, तो काफी हो हल्ला मचा। अभिभावक सहित लोगों ने प्रिंसिपल और आरोपी ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। 

दिसंबर के पहले हफ्ते में फतेहाबाद की भूना ब्लाक में स्थित एक निजी स्कूल में मोबाइल लाने पर प्रिंसिपल ने दो छात्राओं की बुरी तरह पिटाई कर दी। सत्रह से उन्नीस साल की छात्राओं को प्रिंसिपल ने ताल घूंसों से पिटाई की। इस घटना का वीडियो वायरल होने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की गई। 

प्रदेश में अक्सर होने वाली ऐसी घटनाएं बताती हैं कि शिक्षक अपनी मर्यादा की सीमा लांघ रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आज से  दो-तीन दशक पहले तक स्कूलों में छात्र-छात्राओं को मार नहीं पड़ती थी। मार पड़ती थी और फटकार भी लगाई जाती थी, लेकिन तब मार और फटकार का  उद्देश्य सुधारात्मक था। चरित्र और व्यक्तित्व विकास के लिए शिक्षक शारीरिक दंड दिया करते थे। उनके शारीरिक दंड का उद्देश्य व्यक्तिगत कुंठा, द्वेष या खीझ निकालना नहीं होता था। बच्चों की भलाई के लिए अध्यापक हर तरीका अपनाते थे, लेकिन अगर सजा भी देनी पड़ती थी, तो वह मानवीय होती थी।

Thursday, December 18, 2025

जनसाधारण की धरोहर है संगीत


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा गांधी की सभाओं और भजन संध्याओं में रामधुन गाकर उसे अमर कर देने वाले विष्णु दिगंबर पलुस्कर का जन्म 19 अगस्त 1872 में हुआ था। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत तो उच्चतम शिखर तक पहुंचाने में पलुस्कर का बहुत बड़ा योगदान रहा है। पलुस्कर में संगीत के मामले में अपार प्रतिभा थी। वह संगीत साधना को सबसे पवित्र मानते थे। 

वह मानते थे कि संगीत राज दरबारों और महफिलों की गुलाम बनने के लिए नहीं है। इसे जन साधारण के बीच लाना चाहिए। वह लोगों के बीच संगीत को प्रसिद्ध करना चाहते थे। यही वजह है कि जब भी महात्मा गांधी की सभा होती थी या दूसरे सामाजिक आयोजन होते थे, वह जरूर वहां जाते थे और अपने संगीत को प्रस्तुत करते थे। रघुपति राघव राजा राम जैसे भजन को पूरे भारत में लोकप्रिय बनाने का श्रेय पलुस्कर को ही है। 

यह भी सही है कि पलुस्कर ने धर्नाजन के लिए भी सार्वजनिक कार्यक्र किए। एक बार की बात है। उनका एक कार्यक्रम धर्नाजन के लिए आयोजित किया गया। आयोजकों की लापरवाही रही या उदासीनता, केवल पांच श्रोता ही संगीत कार्यक्रम में आए। आयोजक ने पलुस्कर को सुझाव दिया कि कार्यक्रम को स्थगित कर देना चाहिए। पलुस्कर ने कार्यक्रम स्थगित करने से इनकार कर दिया। 

उन्होंने कहा कि जिन पांच लोगों ने टिकट खरीदा है, उनको संगीत न सुनने देना, अपराध है। उन्होंने समय जाया किया है। उन्होंने उस कार्यक्रम बड़ी श्रद्धा और तन्मयता से गायन शुरू किया कि पांचों लोग भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम के बाद उनके गायन की पूरे शहर में इतनी चर्चा हुई कि अगली बार जब उनका कार्यक्रम हुआ, तो भारी भीड़ जुटी। टिकटों के लिए लंबी कतारें लगी थीं।

हरियाणा विधानसभा सत्र हंगामेदार होने की संभावना

अशोक मिश्र

आज यानी 18 दिसंबर से हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है। कल ही बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होगी जिसमें तय किया जाएगा कि विधानसभा सत्र कितने दिन चलेगा। वैसे उम्मीद जताई जा रही है कि हरियाणा विधानसभा का सत्र 22 दिसंबर तक चलेगा। इस बीत दो दिन अवकाश रहेगा। यदि 22 दिसंबर तक ही सत्र चलने की अवधि मानी जाए, तो केवल तीन दिन ही विधानसभा का सत्र चलेगा। इस बार विधानसभा सत्र में बड़े पैमाने पर हंगामेदार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 

16 दिसंबर को ही कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक बुलाकर सरकार को घेरने की सारी तैयारियां कर ली हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि कांग्रेस इस बार सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। विधानसभा सत्र के दौरान वोट चोरी के मुद्दे पर घमासान होना तय माना जा रहा है। वैसे भी संसद और संसद से बाहर कांग्रेस पार्टी वोट चोरी के मुद्दे पर बहुत ज्यादा मुखर है। 

कांग्रेस नेता तो अब हर बात में वोट चोरी का मुद्दा उठाने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसी हालत में वह विधानसभा सत्र के दौरान वोट चोरी के मुद्दा जरूर उठेगा।  इतना ही नहीं, सदन के भीतर खेल परिसरों में खेल सुविधाओं, सामग्री के अभाव, बदहाली जैसे मुद्दों पर काम रोको प्रस्ताव लाया जा सकता है। सदन में अरावली को बचाने, जलभराव मुआवजा, बढ़ते प्रदूषण, धान घोटाला, कानून व्यवस्था, मनरेगा, बढ़ते नशे, भ्रष्टाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को ध्यानाकर्षण और अल्प चर्चा प्रस्तावों के माध्यम से उठाया जाएगा, ऐसी संभावना है। वैसे सरकार ने भी विपक्ष को जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। 

राज्य सरकार ने उन सभी मुद्दों पर पहले से ही काम पूरा कर लिया है जिसके सदन में उठने की संभावना है। जहां तक रोहतक के गांव लाखनमाजरा के बास्केट बाल खिलाड़ी हार्दिक की मौत का मामला है, राज्य सरकार पहले ही जिला खेल अधिकारी को निलंबित कर चुकी है। विभिन्न जिलों में खेल परिसरों का बड़े पैमाने पर सुधार करा रही है। कानून व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त बनाने और अपराधियों पर अंकुश लगाया जा चुका है। करीब नौ हजार से अधिक अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। किसानों को भी कर्ज के ब्याज पर माफी देकर सरकार ने विपक्ष के सवालों को तर्कहीन करने की व्यवस्था कर ली है। 

कुछ दिनों पहले ही प्राकृतिक आपदा के चलते बरबाद हुई फसलों का मुआवजा भी किसानों को दिया जा चुका है। सत्र के दौरान पूछे जाने वाले सवालों के जवाबों की फाइल भी तैयार कर ली गई है। इस तरह शीतकालीन सत्र के दौरान एक दूसरे को शिकस्त देने की तैयारी सत्तापक्ष और विपक्ष ने कर ली है। बस, इंतजार है तो 18 दिसंबर का। सत्र के दौरान जोरदार बहस देखने को मिलेगी।

Wednesday, December 17, 2025

हरियाणा में टिकाऊ नहीं होते राजनीतिक दलों के गठबंधन

अशोक मिश्र

हरियाणा का मिजाज दूसरे राज्यों से कुछ अलग है। वैसे यहां की दोस्ती की भावना प्रसिद्ध है। दोस्ती के लिए यहां के लोग कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन राजनीतिक दलों का मिजाज जुदा है। हरियाणा में राजनीतिक दलों की एक दूसरे से दोस्ती यानी गठबंधन तो हुआ, लेकिन वह टिकाऊ नहीं रहे। पिछले विधानसभा चुनाव की ही बात की जाए, तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आप कहने के लिए भले ही इंडिया गठबंधन में रहे हों, लेकिन हकीकत में दोनों ने एक दूसरे का साथ नहीं दिया। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यही नाटक हुआ। 

कांग्रेस बेमन से आम आदमी पार्टी से बातचीत और सीटों के बंटवारे को लेकर नाटक करती रही। कभी आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तुनक जाते, तो कभी राहुल गांधी का मन बातचीत को आगे बढ़ाने का नहीं होता था। अंतत: दोनों ने अपने-अपने कैंडिडेट खड़े किए और जो नतीजा आया, सबको मालूम है। वैसे राज्य में कांग्रेस हमेशा से अकेले चलने की आदी रही है। 

वह चाहे जीते, चाहे हारे, वह अकेले ही चुनाव लड़ना पसंद करती है। वहीं भाजपा, बसपा, इनेलो, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियां एक दूसरे के सहारे ही आगे बढ़ी हैं। शायद यह पहला मौका है, जब भाजपा ने अकेले सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की है। इससे पहले उसकी सरकार बैसाखियों पर ही टिकती रही है। कई दल और उसके नेता चुनावों के दौरान एक दूसरे के साथ आए, लेकिन अपना हित और अपना ईगो साथ लेकर आए। एक दूसरे से जुड़े, लेकिन मन से नहीं जुड़े। प्रदेश में जब भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव हुए, भाजपा ने हविपा, इनेलो और जजपा से गठबंधन किया, लेकिन चुनाव बाद ही या एकाध साल तक ही यह गठबंधन चला। 

बाद में भाजपा ने अपना अलग रास्ता अख्तियार किया, तो हविपा, इनेलो और जजपा ने दूसरी राह पकड़ ली। कई बार तो इधर चुनाव खत्म, उधर दोस्ती यानी गठबंधन खत्म। इनेलो और बसपा के बीच अब तक तीन बार गठबंधन हुआ, लेकिन जल्दी ही खत्म हो गया। आज भले ही भाजपा के पास सबसे ज्यादा विधायक और सबसे ज्यादा संगठित विधायक हों, लेकिन सन 2014 से पहले भाजपा गठबंधन के ही सहारे आगे बढ़ती रही। पीएम नरेंद्र मोदी की देश में सुनामी आने के बाद ही भाजपा की किस्मत चमकी और लगातार तीन बार सत्ता पर काबिज होने में सफल रही है। 

लेकिन कांग्रेस एकला चलो रे की राह पर ही चलती रही। पिछले एक साल से कांग्रेस ने भी अपने संगठन की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। उसके कार्यकर्ता थोड़े बहुत सक्रिय हुए हैं, लेकिन अभी इस मामले में उन्हें भाजपा से बहुत कुछ सीखना होगा। भाजपा की ही तरह कांग्रेस को भी हमेशा चुनावी मोड में ही रहना होगा, तभी फायदा होगा।

Tuesday, December 16, 2025

नासा के अंतरिक्ष अभियानों को दी नई दिशा

बोोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

एक सौ एक साल तक जिंदा रहने वाली क्रेओला कैथरीन जॉनसन की गणनाएं इतनी सटीक होती थीं कि अंतरिक्ष में जाने वाले यात्री तब तक यात्रा के लिए तैयार नहीं होते थे, जब तक उन्हें विश्वास न हो जाए कि कैथरीन ने गणना कर ली है। 26 अगस्त 1918 को वेस्ट वर्जीनिया में जन्मी कैथरीन की गणित में बचपन से ही रुचि थी। वह जब पांचवीं कक्षा में थीं, तब वह हाईस्कूल स्तर के गणित के सवाल हल कर लेती थीं। 

बचपन से ही पढ़ने में तेज कैथरीन ने 14 साल की उम्र में ही हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी। उन्हें लोग बड़े आदर के साथ मानव कंप्यूटर कहा करते थे। चार भाई बहनों में सबसे छोटी कैथरीन की मां शिक्षिका थीं और उनके पिता एक लकड़हारा, किसान और कारीगर थे।  अश्वेत परिवार में जन्मी कैथरीन की मां शिक्षा का महत्व समझती थीं। यही वजह है कि तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने पर बहुत ध्यान दिया। अमेरिका में उन दिनों रंगभेद की भावना बहुत प्रबल थी। 

अमेरिका के श्वेत नस्ल के लोग अश्वेतों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया करते थे। इसका शिकार कैथरीन भी होती रहीं। उनके साथ भेदभाव किया जाता था, लेकिन वह रंगभेदी व्यवहार का मुकाबला बड़ी हिम्मत और अपनी विलक्षण प्रतिभा से देती रहीं। लैंगिक भेदभाव की भी शिकार हुईं। अपनी प्रतिभा के बल पर 1953 को उन्होंने नासा में ज्वाइन किया और अंतरिक्ष से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियानों में सराहनीय योगदान किया। 

उनकी सेवाओं के लिए 2015 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जॉनसन को प्रेसिडेंशियल मेडल आॅफ फ्रीडम से सम्मानित किया। 2016 में उन्हें नासा के अंतरिक्ष यात्री लीलैंड डी. मेल्विन द्वारा सिल्वर स्नूपी अवार्ड और नासा ग्रुप अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। 24 फरवरी 2020 में कैथरीन की मृत्यु हो गई।

प्रदूषण हो रहा जानलेवा, फिर भी पाबंदियों का हो रहा उल्लंघन


अशोक मिश्र

दिल्ली एनसीआर में ग्रैप चार की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। दिल्ली के कुछ इलाकों में रविवार को साढ़े चार सौ से ज्यादा वायु गुणवत्ता सूचकांक पहुंच गया था। यह स्थिति इंसानों के लिए काफी खतरनाक मानी जाती है। हवा में मौजूद कण धीरे-धीरे इंसान के लंग्स, हार्ट और ब्रेन पर असर डालते हैं। इसके शुरुआती संकेत अक्सर सामान्य थकान या सर्दी-खांसी जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यही प्रदूषक अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। 

लोगों को पता भी नहीं चलता है। कई बार तो लोग इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझकर टालते रहते हैं, लेकिन जब परेशानी बढ़ जाती है, तब उन्हें पता चलता है कि वह कितनी बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि वायु प्रदूषण को साइलेंट किलर कहा जाता है। दिल्ली एनसीआर सहित पूरे हरियाणा में वायु प्रदूषण काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। ग्रैप चार की पाबंदियां लागू होने के बावजूद राज्य के कई शहरों में उल्लंघन किया जा रहा है। वैसे तो पूरे राज्य में भवन निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। लेकिन कई शहरों में न केवल भवन निर्माण किए जा रहे हैं, बल्कि खुले में ही बालू, मौरंग और भवन निर्माण में काम आने वाली वस्तुएं रखी जा रही हैं। 

वैसे तो डीजल से चलने वाले वाहनों पर रोक लगा दी गई है, लेकिन सड़कों पर डीजल से चलने वाले वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। प्रदेश में पराली जलाने को लेकर पूरी तरह रोक है। खुशी की बात यह है कि पराली जलाने के मामले में काफी कमी आई है। वैसे भी अब खेतों में पराली रह भी नहीं गई है क्योंकि पराली का निस्तारण करके अब गेहूं की बुआई हो चुकी है, लेकिन इतना होने के बाद भी कभी-कभार पराली जलाने की घटनाएं प्रकाश में आ ही जाती हैं। सड़कों का कूड़ा जलाना हर मौसम में प्रतिबंधित रहा है, लेकिन वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के बावजूद कूड़ा जलाया जा रहा है। 

स्थानीय निकाय के कर्मचारी या जिन कंपनियों को कूड़ा उठाने का ठेका दिया गया है, कूड़े को जला देने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। वे यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि इससे पर्यावरण प्रदूषित होगा और वे भी इसकी चपेट में आएंगे। इसके बावजूद वे लापरवाही करते हैं। विभिन्न शहरों में कबाड़ का काम करने वाले लोग शाम बीत जाने के बाद सड़क किनारे या किसी खाली जगह पर कबाड़ ले जाकर उसे आग के हवाले कर देते हैं। इसके बाद मौके से वह गायब  हो जाते हैं ताकि कानून की गिरफ्त में न आ सकें। प्रदूषण की स्थिति में सड़कों पर पानी के छिड़काव का नियम बनाया गया है, लेकिन कुछ ही शहरों में इस नियम का पालन किया जाता है।

Monday, December 15, 2025

वैशाली के सेनापति का सर्वोच्च बलिदान

 


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बिहार में स्थित वैशाली को दुनिया के पहले गणतंत्र का जन्मदाता माना जाता है। कहते हैं कि महाभारत काल में इस नगर को विशाल नामक राजा ने बसाया था, जिसे कालांतर में वैशाली के नाम से जाना गया। इस नगर का संबंध जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर स्वामी महावीर और महात्मा बुद्ध से भी है। स्वामी महावीर का यहीं जन्म हुआ था और महात्मा बुद्ध ने यहां अपने जीवन का अंतिम प्रवचन दिया था और अपने निर्वाण की घोषणा की थी। 

एक बार की बात है। प्राचीन काल में वैशाली महानगर में पूरे उत्साह के साथ राज्य महोत्सव मनाया जा रहा था। राजा से लेकर प्रजा तक महोत्सव में भाग ले रही थी। उसी समय पड़ोसी राज्य के सेनापति ने वैशाली पर आक्रमण कर दिया। अचानक हुए हमले की वजह से वैशाली वालों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। वह हार गए। शुत्र सेनापति ने वैशाली की प्रजा पर जुल्म करना शुरू कर दिया। 

इसे देखकर वैशाली का सेनापति बहुत विचलित था। वह शत्रु सेनापति के पास जाकर बोला कि आप हमारी प्रजा पर जुल्म करना बंद कर दीजिए। शत्रु सेनापति ने सामने बह रही नदी की ओर संकेत करते हुए कहा कि नदी में जितनी देर तक आपका सिर डूबा रहेगा, तब तक प्रजा पर कोई अत्याचार नहीं होगा। वैशाली का सेनापति नदी में कूद गया। काफी देर हो गई, सेनापति बाहर नहीं आया। 

तब तक प्रजा पर अत्याचार रुका रहा। शत्रु सेनापति ने गोताखोरों को पानी में उतारा। गोताखोरों ने लौटकर बताया कि सेनापति ने नदी तल में एक बड़े से चट्टान को अपनी बाहों से जकड़ रखा है। अपनी प्रजा के प्रति इतना समर्पण देखकर शत्रु सेनापति का हृदय द्रवित हो गया। वह तुरंत अपने राज्य वापस लौट गया।

छाने लगा कोहरा, तेज रफ्तार गाड़ी चलाने से बचने में भलाई



अशोक मिश्र

उत्तर भारत में अब कोहरे की चादर छाने लगी है। रविवार की सुबह कोहरे की वजह से दृश्यता दस मीटर से भी काफी कम रही। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरे हरियाणा में पचास से अधिक वाहन आपस में टकरा गए। इन हादसों में दो लोगों की मौत हो गई। अकेले रोहतक में ही अलग-अलग जगहों पर चालीस वाहन आपस में टकराए हैं। वायु प्रदूषण की वजह से दिसंबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर पूरी जनवरी तक मौसम खराब रहता है। कभी घना कोहरा छाया रहता है, तो कभी पाला गिरने लगता है। ऐसी स्थिति में सड़कों पर वाहन चलाना काफी मुश्किल हो जाता है। 

रास्ता ठीक से दिखाई न देने की वजह से वाहनों में आमने-सामने टक्कर हो जाती है। कई बार तो वाहन सड़क छोड़ देते हैं जिसकी वजह से हादसे हो जाते हैं। सड़क में किनारे चलने वाले लोग भी हादसे का शिकार हो जात्ो हैं। आमतौर पर यह भी देखने में आता है कि कोहरा और धुंध के बावजूद कुछ वाहन चालक धीमी गाड़ी चलाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। पिछले साल भी सर्दियों में हरियाणा में कई ऐसी घटनाएं वाहनों की तेज रफ्तार की वजह से हुई थीं। इस तरह के हादसों ने कई लोगों की जान ले ली थी। 

जब वातावरण में कोहरा और स्माग छाया हो, तो वाहन चालकों को सावधानी बरतनी चाहिए। मौसम में बदलाव के दौरान धुंध के कारण कई बार छोटे-बड़े सड़क हादसे घटित होते हैं, जिन्हें केवल थोड़ी सी सावधानी से रोका जा सकता है। वे यातायात नियमों का पालन करें और पूरी सतर्कता के साथ वाहन चलाएँ। कोहरे में वाहन चलाते समय सबसे महत्वपूर्ण है कि वाहन चालक सड़क के बाएं किनारे को ध्यान में रखते हुए वाहन को नियंत्रित गति में चलाएं। कोहरे में दृश्यता कम हो जाती है, इसलिए आगे चल रहे वाहन से उचित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। 

चालक को चाहिए कि वह हाई बीम का प्रयोग कतई न करें, क्योंकि इससे रोशनी कोहरे में बिखर जाती है और दृश्यता और भी कम हो जाती है। इस कारण सामने से आने वाले वाहन चालक को परेशानी होती है और उसे सामने देखने में परेशानी हो सकती है। इसके स्थान पर लो बीम पर हेडलाइट रखना चाहिए जिससे आगे का रास्ता बेहतर दिखाई दे। सामने वाले वाहन चालक को भी आपकी गाड़ी स्पष्ट दिख सकेगी। 

अगर वाहन हाईवे पर चल रहा है, तो चालक को चाहिए कि वह फीली लाइन को फॉलो करे ताकि वह सड़क दिशा न भटके। यदि सामने मोड़ हो, तो चालक को बहुत पहले से ही इंटीकेशन देना चाहिए ताकि सामने से आने वाला समझ जाए कि आप भी अपनी साइड में मोड़ने वाले हैं। कोहरे के दौरान जरूरत न होने पर दूसरे वाहन को ओवरटेक करने से बचना चाहिए। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है।

Sunday, December 14, 2025

जब चींटी सफल हो सकती है, तो मैं क्यों नहीं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

सफलता का कोई निश्चित सूत्र या फार्मूला नहीं होता है। लेकिन यह तय है कि यदि व्यक्ति में लगन और हिम्मत हो, तो वह कठिन से कठिन काम करने में सफल हो सकता है। भले ही उसे सफलता मिलने में कुछ समय लगे। यह प्रसंग एक मूर्तिकार की सफलता से जुड़ा हुआ है। प्रसंग यह है कि किसी राज्य का एक दिन शिकार के लिए निकला।

 जंगल में उसे एक हिरन दिखा, तो वह उसका शिकार करने के लिए उसकी ओर चला गया। हिरन को भी राजा के आने की आहट मिल गई तो वह जंगल की ओर भागा। राजा ने हिरन का पीछा किया। हिरन का पीछा करते-करते राजा पहाड़ियों के नजदीक जा पहुंचा। 

वहां पहुंचने पर उसने देखा कि एक मूर्तिकाल पत्थर की मूर्तियां बना रहा था। उसने मूर्तियां बहुत अच्छी बनाई थीं। राजा ने उस मूर्तिकार से कहा कि मेरी भी एक अच्छी सी मूर्ति बना दो। मूर्तिकार ने विनम्रता से कहा कि आपकी मूर्ति बनाना मेरा सौभाग्य होगा, लेकिन कई दिन लग जाएंगे। राजा तैयार हो गया। मूर्तिकार राजा की मूर्ति बनाता, लेकिन अगले ही दिन तोड़ देता। वह कहा करता था कि मूर्ति अच्छी नहीं बनी है। इसी तरह कई दिन बीत गए। एक दिन निराश होकर मूर्तिकार अपनी मूर्तियों के पास बैठ गया। 

उसने देखा कि एक चींटी अनाज का एक दाना लेकर दीवार पर चढ़ने का प्रयास कर रही है। वह बार-बार गिरती है, लेकिन प्रयास करना नहीं छोड़ती है। कई बार के प्रयास के बाद चींटी दाना लेकर दीवार पर चढ़ने में सफल हो गई। मूर्तिकार ने सोचा कि जब यह छोटी सी चींटी कई बार के प्रयास में सफल हो सकती है, तो मैं क्यों नहीं सफल हो सकता हूं। फिर उसने राजा की लगन से बहुत अच्छी मूर्ति बनाई जिसे देखकर राजा बहुत खुश हुआ।

लालची प्रवृत्ति के कारण लोग साइबर ठगी का होते हैं शिकार


अशोक मिश्र

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विस्तार होता जा रहा है,  लोगों का जीवन सरल होता जा रहा है। यह सही है कि टेक्नोलॉजी से देश और समाज को बहुत फायदे हैं। जीवन में सरलता और ठहराव आता जा रहा है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। जब से नई-नई टेक्नोलॉजी के चलते बैंकिंग प्रणाली आसान हुई है, लोगों को अब छोटे-मोटे कामों के लिए बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं, वहीं, कुछ चालाक लोगों ने टेक्नोलॉजी का लाभ उठाकर अपराध भी करना शुरू कर दिया है। 

साइबर ठगी भी इसका सबसे आसान तरीका है। देश के विभिन्न इलाकों में छिपे बैठे साइबर ठग किसी को भी अपना शिकार बना लेते हैं। पिछले दिनों ही हरियाणा पुलिस ने पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह लोग ह्वाट्सएप पर लोगों से संपर्क करके उन्हें एक ऐप डाउनलोड करने को कहते थे। ऐप डाउनलोड होने के बाद साइबर अपराधी अपने शिकार को शेयर बाजार में पूंजी निवेश करने के लिए उकसाते हैं। शिकार जब अपराधियों पर विश्वास करने लगता है, तो पहले छोटी-छोटी रकम पूंजीनिवेश करने को कहते हैं। ऐप पर मुनाफा होता हुआ भी दिखाते हैं। जब उनका टारगेट यानी शिकार पूरी तरह मुट्ठी में आ जाता है, तब वह भारी भरकम रकम निवेश करने के लिए कहते हैं। 

जब पूंजी निवेश हो जाता है, तो मुनाफा दिखाने वाला ऐप बंद हो जाता है और साइबर ठग अपने मोबाइल स्विच आफ करके बैठ जाते हैं या फिर सिम ही बदल लेते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी तरह साइबर ठगों के संपर्कमें आ जाए, तो वह उसे धमकाते भी हैं। हरियाणा में साइबर ठगी के मामले पिछले कई वर्षों से बढ़ते ही जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन इन पर लगाम लगाने की हरसंभव कोशिश कर रहा है, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। सरकार और पुलिस प्रशासन बार-बार लोगों को साइबर ठगों के मामले में जागरूक कर रही है, लेकिन उसका लाभ इसलिए नहीं मिल रहा है क्योंकि लोग बिना मेहनत किए ढेर सारा पैसा कमाने के फेर में पड़ जाते हैं। अपनी लालची प्रवृत्ति के चलते ही लोग साइबर ठगों के चंगुल में फंसते हैं। 

जब अपनी जमा पूंजी लुटा चुके होते हैं, तब वह पुलिस की शरण में भागते हैं। वैसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर पुलिस प्रशासन साइबर अपराधियों सहित सभी प्रकार के अपराधियों को गिरफ्तार करने में पूरे मन से लगी हुई है। यही वजह है कि हरियाणा पुलिस को 2024 में साइबर धोखाधड़ी रोकने के मामले में देश में पहला स्थान मिला था। हरियाणा पुलिस ने साइबर अपराधियों से लगभग 268.40 करोड़ रुपये बचाए थे, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 76.85 करोड़ रुपये था। यह राशि 2023 की तुलना में 2024 में बचाई गई राशि तीन गुना और 2022 की तुलना में पांच गुना अधिक है।