हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से भारी बरसात होने और भूस्खलन के चलते यमुना नदी उफान पर है। हरियाणा के कई जिलों के ग्रामीण इलाकों में पानी भर गया है। हरियाणा के भी कई जिलों में भारी बरसात होने की वजह से स्थिति गंभीर होती जा रही है। दो दिन पहले दिल्ली में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर 204.58 मीटर तक पहुंच गया था।
इसका कारण यह था कि हथिनी बैराज कुंड से 61354 क्यूसेक पानी दिल्ली की ओर डायवर्ट किया गया था। हालांकि यह भी सही है कि हरियाणा के कुछ इलाकों में नहरी पानी की खपत लगभग एक हजार क्यूसेक कम हुई है। खेतों में प्राकृतिक रूप से बरसने वाला पानी किसानों को उपलब्ध हो रहा है। इसकी वजह से खपत घट गई है। हरियाणा में बारिश के चलते कैचमेंट एरिया में पानी भर गया है। इसके अलावा हथिनी बैराज से भी कुछ पानी हरियाणा के कई इलाकों में भर गया है।
हथिनी बैराज की क्षमता अधिक से अधिक एक लाख क्यूसेक पानी रोके रखने की है। इसके अधिक पानी होने पर बैराज से पानी को छोड़ना अनिवार्य हो जाता है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के इलाकों में तबाही मचा सकता है। हरियाणा में यमुनानगर, करनाल, फरीदाबाद, पलवल और पानीपत जिलों में यमुना नदी का पानी काफी नुकसान पहुंचाता है। इन जिलों में बाढ़ के पानी से फसलों को बहुत नुकसान होता है। बाढ़ की वजह से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बाढ़ की वजह से खेतों में कटाव हो रहा है। खेत की मिट्टी बहकर नालों और नदियों में जा रही है।
उनकी फसल और मिट्टी दोनों संकट में हैं। धान, सब्जियां और अन्य फसलें बाढ़ में बह गई हैं। इस नुकसान की भरपाई हो भी नहीं पाएगी क्योंकि सरकार जो मुआवजा देगी, वह वास्तविक नुकसान से कम ही होगा। मुआवजा भी बाद में ही मिलेगा। इसके चलते निश्चित तौर पर किसानों की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। किसान अपनी पूंजी और मेहनत एकाएक बह जाने से काफी निराश हैं। इन दिनों हो रही बारिश और बाढ़ का पानी जल्दी से नहीं घटा, तो खेत की नमी कम नहीं होगी।
अगले महीने से गेहूं की बुआई शुरू होने वाली है। खेत में ज्यादा नमी रहने की वजह से गेहूं की बुआई भी नहीं हो सकती है। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि इस बार गेहूं की बुआई का रकबा भी घट सकता है। इससे किसानों की व्यक्तिगत क्षति तो होगी ही, प्रदेश का भी नुकसान होगा। महंगाई और खेती की लागत से परेशान किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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