अशोक मिश्र
चार्ल्स डिकेंस को विक्टोरियन युग का महान अंग्रेजी साहित्यकार माना जाता है। डिकेंस का बचपन बहुत गरीबी में बीता था। उनका जन्म 7 फरवरी 1812 को पोर्ट्समाउथ में जॉन और एलिजाबेथ डिकेंस के घर हुआ था। अन्य बच्चों की तरह डिकेंस को नौ साल की उम्र में स्कूल भेजा गया। लेकिन स्कूली शिक्षा बहुत ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी। उनके पिता कर्ज के कारण जेल में डाल दिए गए थे।
जॉन डिकेंस के साथ उनके पूरे परिवार को मार्शलसी भेज दिया गया था। इसके चलते बहुत जल्दी ही उनकी स्कूली शिक्षा भी बंद हो गई। चार्ल्स को वॉरेन की ब्लैकिंग फैक्टरी में काम करने के लिए भेज दिया गया। वहां उन्हें भयावह परिस्थितियों के साथ-साथ अकेलेपन और निराशा का भी सामना करना पड़ा। लेकिन चार्ल्स में पढ़ने की जो ललक थी, वह कभी कम नहीं हुई। वह अपने आसपास की पुरानी लाइब्रेरियों में जाकर साहित्य पढ़ा करते थे। उनके साथी उनका मजाक उड़ाते थे कि पढ़-लिखकर तुम कौन सा अपना पेट भर लोगे।
वह साथियों को जवाब देते हुए कहा करते थे कि पेट तो किसी भी तरह भरा जा सकता है, लेकिन आत्मा की भूख इससे ही मिटेगी। तीन साल बाद उन्हें फिर से स्कूल भेज दिया गया। पढ़ाई लिखाई पूरी होने पर उन्होंने पत्रकार बनना स्वीकार किया और साहित्यिक रचनाएं लिखने लगे।
बचपन का अनुभव उनसे कभी नहीं भुलाया गया और उनके दो प्रसिद्ध उपन्यासों 'डेविड कॉपर फील्ड' और 'ग्रेट एक्सपेक्टेशंस' में इसे काल्पनिक रूप दिया गया। चार्ल्स की रचनाओं में गरीबों, अनाथ बच्चों और शोषितों की पीड़ा इतनी मुखर हो उठती है कि पढ़ने के बाद मन को झकझोर देती है।
No comments:
Post a Comment