बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
कुछ लोगों को अपनी मेहनत और प्रतिभा पर इतना भरोसा होता है कि वह उसके बलबूते पर बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं। उनके जीवन की परिस्थितियां लाख विपरीत हों, लेकिन वह अपना साहस और परिश्रम करना नहीं छोड़ते हैं। दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे हुए हैं जिन्होंने अपने परिश्रम से दुनिया का हर सुख हासिल किया है।
ऐसे ही एक बालक की कथा बहुत लोकप्रिय है। उसका नाम किलेंथिस बताया जाता है। किलेंथिस यूनान में रहने वाले प्रसिद्ध तत्वज्ञानी जीनो के विद्यालय में पढ़ता था। पढ़ने में काफी तेज होने की वजह से दूसरे विद्यार्थियों की नाराजगी का वह केंद्र बन गया था। गुरु जीनो भी किलेंथिस को उसकी प्रतिभा और लगन के चलते बहुत मानने लगे थे। इससे दूसरे विद्यार्थी उससे जलते थे।
चूंकि वह गरीब घर का था, तो उसके कपड़े भी अच्छे नहीं थे। हां, विद्यालय को दी जाने वाली फीस वह नियत समय पर जरूर जमा कर देता था। उससे ईर्ष्या करने वाले विद्यार्थियों को उस पर प्रहार करने का एक अच्छा मौका मिल गया। उन्होंने किलेंथिस पर चोरी करके फीस जमा करने का आरोप लगाकर पकड़वा दिया। इस पर वह डरा कतई नहीं। जब उसका मामला अदालत में गया, तब उसने निर्भीकता से अपने को निर्दोष बताते हुए जज के सामने दो गवाह पेश करने की इजाजत मांगी।
इजाजत मिलने पर उसने दो लोगों को अदालत में पेश कर दिया। एक गवाह माली था। उसने बताया कि कलेंथिस उसके बाग में आकर पौधों को पानी आदि देता है जिसके बदले कुछ पैसे मैं उसे देता हूं। दूसरी गवाह एक बुढ़िया ने बताया कि वह घर आकर रोज मेरा आटा पीस देता है। मैं भी कुछ पैसे दे देती हूं। इससे वह फीस और अपने खर्चे पूरे करता है। दोनों गवाहों के बयान सुकर जज ने उसे बरी कर दिया। जज ने मदद का प्रस्ताव रखा तो उसने मना कर दिया।