बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
संस्कृत साहित्य में कहा गया है कि सच्चा दोस्त संकट के समय में अपने मित्र का साथ नहीं छोड़ता है। सच्चा मित्र सभी तरह के पाप कर्म से दूर रखता है, लेकिन हितकारी कामों को करने के लिए उत्साहित करता है। ऐसे ही एक सच्चे दोस्त की एक कथा है। किसी राज्य के राजा ने घोषणा की कि राज कुमार को देश निकाला दिया जाता है। जो भी व्यक्ति राज कुमार का पक्ष लेगा या फिर उसकी सहायता करता हुआ पाया जाएगा, उसको कठोर दंड दिया जाएगा।यह घोषणा सुनकर राजकुमार चकित रह गया। उसको दुख भी हुआ कि उसने कोई ऐसा अपराध भी नहीं किया है जिसकी वजह से उसके पिता ने उसे ऐसा कठोर दंड दिया है। राजकुमार के तीन परम प्रिय मित्र थे। वह ऐसे कठिन समय में सहायता मांगने एक मित्र के पास पहुंचा। मित्र ने उसे देखते ही दरवाजा बंद कर लिया और कहा कि मैं कोई सहायता नहीं कर सकता।
दूसरे मित्र ने कहा कि कहीं भी जाने के लिए मेरा घोड़ा ले जाओ। इससे ज्यादा मदद नहीं कर सकता हूं। जब राजकुमार अपने तीसरे मित्र के पास पहुंचा, तो उसके मित्र ने राजकुमार का स्वागत करते हुए कहा कि मैं हर हालत में तुम्हारे साथ हूं। लेकिन एक बार चलकर राजा से पूछ लिया जाए कि उन्होंने ऐसा आदेश दिया क्यों? दोनों राजा के पास पहुंचे।
उन्हें देखते ही राजा ने राजकुमार के मित्र कहा कि तुम्हें मालूम है कि क्या सजा मिलेगी? मित्र ने कहा कि आप जो भी सजा देंगे, मंजूर है, लेकिन यह तो बताएं राजकुमार का अपराध क्या है? राजा ने कहा कि मैं अब राजकुमार को गद्दी सौंपने की सोच रहा था। जिसके साथ एक सच्चा मित्र होता है, वह जीवन में सफल होता है। राजकुमार के राजा बनने पर तुम मंत्री बनोगे।

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