अशोक मिश्र
बीसवीं सदी में कहानियों, लघु कथाओं और उपन्यास के मामले में जर्मनी के लेखक फ्रांज काफ्का महान माने जाते हैं। 3 जुलाई 1883 को काफ्का का जन्म एक जर्मन यहूदी परिवार में हुआ था। काफ्का के पिता हरमन्न काफ्का जर्मनी में एक दुकान चलाते थे। वह बहुत क्रूर किस्म के दुकानदार थे। उनकी मां जूली दुकान में अपने पति का हाथ बंटाती थीं।काफ्का ने भी बड़े होने पर बीमा कंपनी में नौकरी की थी। जिस दौर में काफ्का का जन्म हुआ था, प्रगतिशीलता धीरे-धीरे जन्म ले रही थी। उनके लेखन में भी आधुनिकता काफी देखने को मिलती है। उनके समकालीन समीक्षकों ने काफ्का को बीसवीं सदी के महान साहित्यकारों में से एक माना है। दुनिया के साहित्यकारों में काफ्का शायद पहले व्यक्ति हैं जिनको मरने के बाद प्रसिद्धि मिली।
अपने जीवनकाल में वह बहुत कम चर्चित रहे। वह जीवन भर अपने लेखन को छापने और पढ़ने के अयोग्य मानते रहे। उनका मानना था कि उनके लेखन में कोई नई और विशेष बात नहीं है। यही वजह है कि उन्होंने अपने घनिष्ठ दोस्त इस्राइली लेखक, संगीतकार और पत्रकार मैक्स ब्राड से जीवन के अंतिम दिनों में अपनी पांडुलिपियां सौंपते हुए कहा था कि इसे जला देना, यह पाठकों के पढ़ने योग्य नहीं है।
असल में काफ्का को जीवन के अंतिम दिनों में तपेदिक रोग हो गया था। उनकी मौत के बाद ब्राड ने मित्र के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए साहित्य को प्रमुखता दी। उन्होंने उनकी पांडुलिपियों को संशोधित करके प्रकाशित किया। द ट्रायल, अमेरिका और द कैसल जैसे उपन्यासों ने पूरी दुनिया में धूम मचा दी। लोगों ने उनकी मौत के बाद उनके लेखन को पहचाना। वह मरने के बाद प्रसिद्ध हो गए।

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