Tuesday, April 7, 2026

हरियाणा में हार्ट अटैक से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ना चिंताजनक

अशोक मिश्र

करीब तीन दशक पहले तक लोग बातचीत के दौरान कहा करते थे कि अगर पहले से ही कोई हृदय संबंधी रोग नहीं है, तो तीस-पैंतीस साल की उम्र वाले व्यक्ति को हार्टअटैक नहीं आता है। यह केवल एक मिथक था। अब तो हालत यह है कि पंद्रह सोलह साल तक के बच्चों की हार्टअटैक या हार्ट फेलियर से मौत हो रही है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कोरोना काल के बाद हार्ट अटैक या हार्ट फेल से होने वाली मौत के आंकड़ों में भारी वृद्धि हुई है। कुछ लोगों ने तो यहां तक अफवाह फैलाई थी कि कोरोना से बचने के लिए लगाए गए टीके की वजह से हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। 

हालांकि केंद्र सरकार ने इस बात को सख्ती से नकार दिया था। स्वास्थ्य विभाग की तमाम जांच रिपोर्टों में भी इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी। लेकिन यह बात भी सच है कि हार्टअटैक की वजह से हरियाणा में भी मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों की खराब जीवन शैली और खानपान को माना जा रहा है। इसके अलावा कम उम्र में लोगों का डायबिटीज अथवा ब्लड प्रेशर जैसे रोग का शिकार होना भी हार्ट अटैक का कारण बन रहा है। जैसे-जैसे परिवार में सुख-सुविधाओं का स्तर बढ़ रहा है, लोगों ने पैदल चलना या शारीरिक श्रम करना एक तरह से बंद ही कर दिया है। 

सड़कों पर अब तो साइकिल चलाता हुआ कोई शायद ही दिखता हो। पैदल चलने से भी लोग कतराने लगे हैं। शारीरिक श्रम और देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने की संस्कृति ने लोगों को बीमारियों का घर बना दिया है। पिछले महीने हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश में हार्ट अटैक या हार्ट फेल से होने वाली मौतों का आंकड़ा पेश किया गया था। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में 17,973 (लगभग 18 हजार) युवाओं की मौत हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से हुई है।

 इन आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में हर दिन 18 से 45 वर्ष के करीब आठ युवाओं की जान हार्ट अटैक से जा रही है। इसी वर्ष जनवरी में ही प्रदेश में 391 लोग हार्ट अटैक से अपनी जान गंवा चुके थे। अगर पिछले छह साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्ष 2020 में 2,394 मौतें हुई थीं। साल 2021 में 3,188, 2022 में 2,796, 2023 में 2,886, 2024 में 3,063 और साल 2025 में 3,255 लोग हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से अपनी जान गंवा चुके हैं। यमुनानगर में पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक 2400 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि गुरुग्राम में 594 और रोहतक में 201 मौतें रिकॉर्ड की गईं।

इसके बावजूद सरकार सरकारी अस्पतालों में हृदय रोगियों के लिए अच्छी व्यवस्था कर पाने में विफल रही है। सरकारी अस्पतालों में दिल की बीमारियों के इलाज के लिए सस्ती और अच्छी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।

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