हरियाणा के कई जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। फसलों को काफी नुकसान हुआ था। ऐसी स्थिति दोबारा न पैदा हो, इससे निपटने के लिए सैनी सरकार ने बंदोबस्त करने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बुधवार को हरियाणा राज्य सूखा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की बैठक में साफ तौर पर कहा कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की नियमित मानीटरिंग की जाए और जो कार्य पिछले साल के अधूरे रह गए हैं, उन्हें जल्दी से जल्दी पूरा किया जाए।
इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 388 बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए 637 करोड़ की मंजूरी भी प्रदान कर दी है। इसमें जिला उपायुक्तों द्वारा प्रस्तावित की गई 102 करोड़ रुपये की 59 परियोजनाएं भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद अधिकारियों से कहा भी कि वर्ष 2023 और 2025 में राज्य के विभिन्न इलाकों में जलभराव और बाढ़ ने लोगों का जीवन अस्तव्यस्त कर दिया था। लोगों और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसी स्थिति भविष्य में न आए, इसके लिए जरूरी है कि बाढ़ से निपटने की तैयारियां अभी से शुरू कर दी जाएं। ड्रेनों की सफाई की व्यवस्था तत्काल की जाए।
जहां भी जरूरत हो, ड्रेनों की सफाई अभी से शुरू कराई जाए, ताकि समय आने पर किसी किस्म की अफरातफरी का सामना न करना पड़े। इतना ही नहीं, नदियों के तटबंधों को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के तटबंधों को मजबूत करने के लिए स्टोन स्टड नई तकनीक से लगाए जाएं ताकि बाढ़ की स्थिति में तटबंधों में कटाव न हो। इसके लिए जरूरत हो तो उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ही स्टोन स्टड लगाए जाएं। सैनी सरकार इस बार समय से पहले सूखा राहत और बाढ़ नियंत्रण को लेकर सतर्क हो गई है।
बजरी से भरे बोरों की भी व्यवस्था करने के निर्देश अभी से ही दिए गए हैं। इस दौरान उन परियोजनाओं पर भी निगाह डाली गई जो पिछले साल पूरी नहीं हो पाई थीं। इन परियोजनाओं को जल्दी से जल्दी पूरा करने को कहा गया है। भविष्य में जिन परियोजनाओं पर काम होना है, वह उसके टेंडर जनवरी माह में ही निकालने के भी दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। बाढ़ से निपटने के लिए हरसंभव उपाय किए जाएं।

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