बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
मैडम क्यूरी पहली महिला थीं जिन्हें भौतिक और रसायन का नोबल मिला था। पियरे क्यूरी से विवाह करने के बाद वह पूरी दुनिया में मैडम क्यूरी के नाम से जानी गईं। पोलैंड में जन्मी मैडम क्यूरी का वास्तविक नाम मारिया स्क्लाडोवका था। वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया।बड़ी बेटी आइरीन को 1935 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को 1965 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था। यह पहला परिवार था जिसने पांच नोबेल पुरस्कार हासिल किया था। इतनी प्रसिद्धि के बावजूद मैडम क्यूरी सादा जीवन व्यतीत करने में विश्वास करती थीं। पूरी दुनिया में ख्याति के बावजूद वह दिन-रात जब भी मौका मिलता था, वह अपने प्रयोगशाला में प्रयोग करती रहती थीं। पति-पत्नी दोनों वैज्ञानिक थे, इस वजह से दोनों एक दूसरे का बहुत सम्मान भी किया करते थे।
एक बार की बात है। एक युवा पत्रकार उनका साक्षात्कार लेने उनके घर आया। उस समय मैडम क्यूरी एक बहुत ही साधारण कपड़े पहनकर बाहर बैठी हुई थीं। उस पत्रकार ने मैडम क्यूरी से पूछा कि क्या तुम यहां की नौकरानी हो? मैडम क्यूरी ने जवाब दिया है-हां, मैं इस घर की नौकरानी हूं। उस पत्रकार ने कहा कि क्या मैडम क्यूरी घर में हैं? क्यूरी ने जवाब दिया-वह बाहर गई हैं।
पत्रकार ने पूछा कि वह कब तक आएंगी? क्यूरी ने जवाब दिया-पता नहीं। पत्रकार ने फिर पूछा, कुछ कहकर गई हैं? क्यूरी ने जवाब दिया-हां, उन्होंने कहा है कि आदमी की पहचान कपड़ों से नहीं, उसके काम से होती है। यह सुनते ही उस पत्रकार ने उन्हें गौर से देखा तो पता लगा कि यही तो मैडम क्यूरी हंै। वह उनकी सादगी से बहुत प्रभावित हुआ।

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