Tuesday, May 5, 2026

सोफी को गणित प्रेम ने कर दिया अमर


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मैरी सोफी जर्मेन एक फ्रांसीसी गणितज्ञ, दार्शनिक और भौतिक विज्ञानी थीं। इनका जन्म 1 अप्रैल 1776 को फ्रांस के पेरिस में हुआ था। इनके पिता एंब्रोइस फ्रांकोइस एक धनी रेशम व्यापारी थे। कुछ लोगों के अनुसार  सुनार थे। सोफी की बचपन से ही गणित में रुचि थी। 

इनके पिता को सोफी का गणित विषय में रुचि लेना कतई पसंद नहीं था। जब सोफी तेरह साल की थीं, उन्हीं दिनों क्रांतिकारियों ने बैस्टिल जेल पर हमला किया। चार घंटे की लड़ाई में 94 लोगों की मौत हुई। अंतत: क्रांतिकारियों ने बैस्टिल पर कब्जा कर लिया। इस कारण पूरे पेरिस में कर्फ्यू जैसा माहौल था। 

लोगों के घर से बाहर निकलने पर एक तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस मौके का फायदा सोफी ने अपने पिता की लाइब्रेरी में गणित की पुस्तकें पढ़ने में उठाया। गणित की पुस्तकों में इनका मन रमता गया। इसी दौरान इनके हाथ में जेई मोंटूक्ला की आर्किमिडीज की मौत की कहानी आई। इससे इनका गणित के प्रति आकर्षण और बढ़ गया। 

इनके पिता ने इनकी गणित की पढ़ाई बंद करने के कई प्रयास किए। रात में इन्हें ओढ़ने-पहनने के लिए गर्म कपड़े नहीं दिए जाते थे। आग जलाने की भी इजाजत नहीं थी। फिर भी सोफी मोमबत्ती जलाकर चुपचाप पढ़ाई करती रहीं। इनके जीवन में बदलाव तब आया जब 1794 में फ्रांस में एक प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान एकोल पॉलिटेक्निक खुला। 

इस संस्थान की खास बात यह थी कि संस्थान में महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता था। तब सोफी ने एक नकली नाम मोंसियूर ले ब्रांक के नाम से अपने नोट्स यहां के प्रोफसरों को भेजना शुरू कर दिया। प्रोफेसर जोसेफ- लुई लांग्रेस इनकी प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए। बाद में इन्हें गणित में योगदान के लिए पेरिस विज्ञान अकादमी का ग्रैंड प्राइज दिया गया।

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