अशोक मिश्र
गॉड पार्टिकल बोसान का नाम इधर कुछ वर्षों से काफी चर्चा में है। बोसान नाम जिस वैज्ञानिक के नाम पर दिया गया था, वह भारतीय थे। उनका नाम सत्येंद्र नाथ बोस था। यह प्रतिभाशाली वैज्ञानिक एक जनवरी 1894 को कोलकाता में पैदा हुआ था। इन्हें दुनिया के महान वैज्ञानिकों में गिना जाता है। बोस की प्रारंभिक शिक्षा घर के पास ही चल रहे एक साधारण स्कूल में हुई थी।स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सत्येंद्र नाथ कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कालेज में पढ़ने गए। बोस स्कूली शिक्षा से लेकर उच्चतर कक्षाओं में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों में रहे। कहा जाता है कि जब वह स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तो उन्होंने गणित के हर प्रश्न के कई तरीके से हल किया था।
उनकी प्रतिभा से प्रसन्न होकर उनके गणित के अध्यापक ने सौ में से एक सौ दस अंक प्रदान किए। जब स्कूल के प्रिंसिपल ने अध्यापक से इसका स्पष्टीकरण पूछा, तो अध्यापक ने सारी बात बताते हुए कहा कि एक दिन यह लड़का बहुत बड़ा वैज्ञानिक बनेगा। उस अध्यापक की बात सच निकली। उन्होंने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी शोध किए। उनकी खोज से मानवता की काफी सेवा हुई।
गणितज्ञ और भौतिकशास्त्री बोस को तार्किक भौतिकी में काफी प्रसिद्धि प्राप्त हुई। बोस को दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ काम करने का भी मौका मिला। अपने वैज्ञानिक कार्यों की वजह से वह रायल सोसाइटी के सदस्य बनाए गए। भारत सरकार ने भी 1954 में उन्हें पद्म विभूषण अलंकरण से सम्मानित किया। शांति निकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए उन्होंने 4 फरवरी 1974 को देह छोड़ दिया था। यह विज्ञान की बहुत बड़ी क्षति थी।










