बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
माइकल फैराडे का जन्म 22 सितंबर 1791 को लंदन में हुआ था। उनका बचपन काफी गरीबी में बीता था। अदम्य जिज्ञासा और सफलता की प्रबल इच्छाशक्ति के बल पर फैराडे ने एक साधारण परिवार में जन्म लेकर भी विज्ञान की बहुत बड़ी सेवा की। उन्होंने मानव समाज को दो प्रमुख उपकरण प्रदान किए जिन्हें सामान्य भाषा में जेनरेटर और ट्रांसफार्मर कहा जाता है।उन्होंने और भी कई खोज किए जिसने समाज को नई दिशा दी। जब वह प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तो एक दिन उनके अध्यापक ने उन्हें बहुत बुरी तरह पीटा। इतना पीटा कि वह फर्श पर बिना हिले डुले काफी देर तक पड़े रहे। उसी दिन से उनकी मां ने स्कूल की पढ़ाई बंद करवा दी। वह कमाने के लिए एक बुक बाइंडर के यहां नौकरी करने लगे। उनकी पढ़ाई लिखाई खासतौर पर विज्ञान में रुचि होने की वजह से वह एक बड़े वैज्ञानिक के संपर्क में आए और आगे चलकर एक महान वैज्ञानिक बने।
एक बार की बात है। एक ब्रिटिश अधिकारी उनसे मिलने रायल सोसायटी पहुंचा। उसने देखा कि रायल सोसायटी की इमारत में कोई नहीं है। दरबान से उसने कहा कि उसे माइकल फैराडे से मिलना है। वह कहां मिलेंगे? उस गार्ड ने इमारत के एक हिस्से की ओर संकेत कर दिया। वह अधिकारी उस ओर गया, लेकिन उसे कोई दिखाई नहीं दिया। बस, एक बुजुर्ग सिंक में कुछ गंदी बोतलें धो रहा था।
उस अधिकारी ने उनसे बेरुखी से पूछा कि तुम यहां के कर्मचारी हो। उस बुजुर्ग ने कहा कि जी हां, मैं चार दशक से यहां सेवा दे रहा हूं। अधिकारी ने कहा कि मुझे एक महान वैज्ञानिक से मिलना है, लेकिन वह दिखाई नहीं दे रहे हैं। बुजुर्ग ने कहा कि आपको जिससे मिलना है, उसका नाम क्या है? अधिकारी ने कहा कि मुझे माइकल फैराडे से मिलना है। बुजुर्ग ने कहा कि वह मैं ही हूं। अधिकारी उनकी सादगी को देखकर दंग रह गया।











