अशोक मिश्र
दुनिया का कोई भी समाज हो, रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी हमेशा उस समाज के लोगों की रही है। हर रिश्ते की अपनी मर्यादा और सीमाएं होती हैं। समाज में रिश्तों की जरूरत इसलिए पड़ी ताकि विभिन्न प्रकार के संबंधों की एक गरिमा, मर्यादा और सीमाएं तय की जा सकें। जिस तरह का व्यवहार व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ कर सकता है, वैसा व्यवहार वह किसी दूसरे रिश्ते की महिला के साथ नहीं कर सकता है।मां, बहन, पत्नी, बेटी, मौसी, बुआ, साली, सलहज जैसे रिश्तों का मार्धुय बनाए रखने के लिए कुछ सीमाएं समाज ने तय कर रखी हैं। वर्तमान समाज में इन रिश्तों की मर्यादा का उल्लंघन करने वाला समाज में निंदा का पात्र ही नहीं होता है, बल्कि कानून भी अपराध की प्रकृति के अनुसार सजा देता है। समाज ने जीजा और साली या सलहज के बीच शिष्ट हास्य की इजाजत तो दी है, लेकिन उसे भी एक निश्चित दायरे में बांध कर रख दिया है ताकि समाज में एक संतुलन बना रहे।
फरीदाबाद के बल्लभगढ़ निवासी एक किशोरी उत्तर प्रदेश के कासना थाना क्षेत्र में रहने वाले जीजा के घर कुछ दिनों तक रहने के लिए गई थी। जब वह नाबालिग थी, तो उसके जीजा ने अपनी साली के साथ दुष्कर्म किया। जीजा ने दुष्कर्म करते समय उसकी वीडियो बना ली। उस अश्लील वीडियो के आधार पर वह नाबालिग साली से दुष्कर्म करता रहा। जब उसकी साली की शादी हो गई, तो उसने दुष्कर्म की वीडियो साली के पति को भेजकर शादी तुड़वा दी। पीड़िता के माता-पिता ने किसी तरह उसकी सगाई दूसरी जगह तय की, तो जीजा ने फिर सगाई तुड़वा दी।
अब पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। निकट संबंधों में दुष्कर्म या अवैध संबंधों के बारे में समाचार पत्रों और टीवी चैनलों पर खबरें आए दिन आती रहती हैं। इन खबरों से पता चलता है कि लोगों ने सामाजिक मर्यादा और लोकलाज ताख पर रख दिया है। ऐसा नहीं है कि पहले ऐसे घृणित कार्य नहीं होते थे, लेकिन तब सूचनाओं का विस्फोट नहीं होता था और घटनाएं भी बहुत कम ही होती थीं। लेकिन पिछले कुछ दशकों से यौन अपराध की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है।
कहते हैं कि सबसे ज्यादा खतरा बच्चियों को निकट संबंधियों से ही होता है। जीजा, फूफा, चाचा, मामा जैसे संबंधी कब मौके का फायदा उठा जाएं, कहा नहीं जा सकता है। ऐसा नहीं है कि निकट संबंधियों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, लेकिन सतर्कजरूर रहना चाहिए। जब से समाज में एकल परिवार का चलन शुरू हुआ है, तब से इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। पहले संयुक्त परिवारों में बच्चियां और महिलाएं अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित रहती थीं। एक ही घर में कई परिवार साथ रहते थे।
सभी एक दूसरे के सुख-दुख में भागीदार होते थे। एक दूसरे के साथ संबंध प्रगाढ़ हुआ करते थे। ऐसी स्थिति में किसी बाहरी या निकट संबंधी की हिम्मत नहीं होती थी, महिला या बच्चा की अपमान करने की।

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