बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
पंडित सुंदरलाल शर्मा को बड़े प्रेम से छत्तीसगढ़ का गांधी कहा जाता है। इनका जन्म 21 दिसंबर 1881 को रायपुर जिले के राजिम के पास चामशुर गांव में हुआ था। वह एक अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने साहित्य में भी अंग्रेजों के खिलाफ रचनाएं लिखीं। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और अहिंसा का समर्थन किया। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए मित्र मंडल की स्थापना की।सन 1918 में धमतारी में राजनीतिक परिषद की स्थापना और 1919 में एक जिला सम्मेलन के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कहा जाता है कि 1921 में महात्मा गांधी को छत्तीसगढ़ लाने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने सन 1929 में कंदेल नामक स्थान में नहर सत्याग्रह की शुरुआत की। इसका नतीजा यह हुआ कि छत्तीसगढ़ में राजनीतिक जागरूकता पैदा हुई।
सुंदरलाल शर्मा महात्मा गांधी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। शर्मा ने जीवन भर दलितों के उत्थान के लिए कार्य किया। हरिजन और अनाथों के लिए आश्रम और स्कूल स्थापित किए। कई भाषाओं के पारखी विद्वान सुंदर लाल शर्मा को बचपन से ही कविता का शौक था। बीस वर्ष की आयु तक वे राजिम क्षेत्र के एक प्रमुख बुद्धिजीवी के रूप में पहचाने जाने लगे थे।
सामाजिक अन्याय के प्रति उनकी सहानुभूति ने उन्हें सक्रिय राजनीति में ला खड़ा किया, जहां उन्होंने गांधीजी, मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय जैसे नेताओं के साथ मिलकर काम किया। छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका के लिए गिरफ्तार होने वाले वे पहले व्यक्ति थे। वे जीवन भर समाज सुधारक बने रहे और जातिवाद, अस्पृश्यता और शोषण के खिलाफ लड़ते रहे। 1940 में उनका निधन हो गया।
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