अशोक मिश्रहरियाणा की सड़कों पर लगे अवैध कट हादसों का प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। प्रदेश में जितनी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, उनमें से लगभग आधी दुर्घटनाएं इन अवैध कटों के कारण होती हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में यह कहीं दर्ज नहीं की जाती हैं। स्टेट हाईवे, एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, डिस्ट्रिक्ट रोड्स और शहरों की सड़कों पर जगह-जगह बने अवैध कट तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के लिए अचानक खतरा पैदा कर रहे हैं। ये कट होटल, ढाबों, पेट्रोल पंपों, गोदामों या स्थानीय लोगों द्वारा सुविधा के नाम पर बनाए जाते हैं।
नतीजा यह होता है कि आने वाली गाड़ियां अचानक सामने आने वाले वाहनों या पैदल यात्रियों से टकरा जाती हैं। पूरे प्रदेश में सड़क हादसों से सालाना लगभग ढाई हजार से तीन हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। 2023 में करीब पांच हजार, 2024 में सवा अड़तालीस सौ और 2025 में तीन हजार से अधिक मौतें दर्ज हुईं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा अवैध कट, अनधिकृत एंट्री-एग्जिट और मेडियन तोड़ने से जुड़ा है। ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि उन परिवारों की कहानियां हैं जिनके कमाने वाले अचानक चले गए या अपंग हो गए।
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर पैदल हाईवे पार करते हुए या अनधिकृत कट से निकलते हुए अक्सर शिकार बन जाते हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य के विभिन्न विभाग अवैध कट बंद करने के अभियान चलाते रहे हैं। पानीपत-अंबाला स्ट्रेच पर चार सौ से अधिक अनधिकृत कट बंद किए गए। गुरुग्राम में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर दर्जनों कट बंद किए गए। करनाल में ढाबा और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुईं। कई जगहों पर क्रैश बैरियर, थ्री बीम बैरियर, रेलिंग और फेंसिंग लगाई गई।
ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए और कुछ जगहों पर फुट ओवर ब्रिज या उचित एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाने की योजनाएं बनीं। यातायात पुलिस ने चेतावनी दी कि अवैध कट से हादसा होने पर एनएचएआई अधिकारियों पर भी केस दर्ज हो सकता है। कुछ जिलों में हादसों की संख्या में मामूली कमी भी आई है जहां इंजीनियरिंग सुधार और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। हरियाणा पुलिस ने माना है कि ढाबों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास बनाए गए अनधिकृत कट हादसों का बड़ा कारण हैं और एनएचएआई को उन्हें स्थायी रूप से बंद करने और दोबारा बनने पर एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है।
इसके बावजूद लोग सड़कों पर अवैध कट लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वह अपनी थोड़ी सी सुविधा के लिए सड़क पर चलने वालों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। लोगों का ऐसा करना, जहां कानूनी रूप से गलत है, वहीं इंसानियत के नाते भी गलत है। यह समस्या तब तक खत्म नहीं हो सकती है, जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होते हैं। जागरूकता ही बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।
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