बाद में लोगों के दबाव पर शिवम मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। उसे गिरफ्तार किया गया। हमारे देश और प्रदेश में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं। अमीर परिवार के लड़के-लड़कियां ट्रैफिक नियमों का पालन करना, अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। वह यह समझ लेते हैं कि पैसे के बल पर कुछ भी किया जा सकता है और कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
उन्हें अपने परिवार के पैसे और ओहदे पर बड़ा अभिमान होता है। लग्जरी गाड़ियों पर नंबर प्लेट तक ठीक ढंग से नहीं लगवाते हैं। बेतुकी नंबर प्लेटों को देखकर पता नहीं चलता है कि गाड़ी का नंबर क्या है? ट्रैफिक पुलिस कर्मी भी इन्हें देखकर अनदेखा कर देते हैं। नंबर प्लेटों के साथ खिलवाड़ तो जैसे आम बात हो गई है। कई गाड़ियों में तो नंबर प्लेट बहुत छोटी होती है और उसके ऊपर या नीचे बड़े बड़े अक्षरों में जाति या धर्म सूचक शब्द लिखा होता है, पार्टी का नाम लिखा होता है या फिर कोई धार्मिक चिह्न बना होता है।
नंबर प्लेट के आसपास ही बड़े बड़े अक्षरों में अटपटे शब्द लिखे होते हैं। यह हाल पूरे हरियाणा का है। राज्य के हर जिले में ऐसी कई गाड़ियां देखने को मिल जाएंगी जिनका नंबर नजदीक से भी देखने पर पता नहीं चलता है। ऐसी स्थिति में इन गाड़ियों के मालिक यदि कोई हादसा करके भाग जाएं, तो इनका पता लगाना काफी मुश्किल होता है। राज्य के हर जिले के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं। इसके बावजूद इनके खिलाफ शायद ही कार्रवाई की जाती हो। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत गाड़ियों पर गलत, फैंसी, धार्मिक या अपठनीय नंबर प्लेट लगाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
वैसे तो वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को अनिवार्य किया गया है, लेकिन ऐसी प्लेट बहुत ही कम गाड़ियों पर लगी मिलती है। नंबर प्लेट पर अंग्रेजी अक्षर और अंक ही होने चाहिए, लेकिन कुछ लोग नंबर प्लेट पर ऐसी कलाकारी करवाते हैं कि उसे देखने पर पागल लिखा दिखाई देता है। ऐसी गाड़ियों को चलाना अपराध की श्रेणी में आता है। ट्रैफिक पुलिस यदा-कदा ऐसी गाड़ियों के खिलाफ मुहिम भी चलाती है, लेकिन गाड़ी मालिक जुर्माना अदा करने के बाद फिर से वही करने लगते हैं। ऐसे लोगों पर यदि भारी जुर्माना लगाया जाए या उनका लाइसेंस ही सस्पेंड कर दिया जाए, तो शायद सुधार हो सकता है।

No comments:
Post a Comment