बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
ईरान में एक बहुत ही न्यायप्रिय और राज्य संचालन में कुशल बादशाह हुआ है जिसे नौशेरवां के नाम से जाना जाता है। इतिहास और ईरानी कथाओं में उसका वास्तविक नाम खुसरो प्रथम बताया जाता है। वह सासानियन बादशाह कोबाद का पुत्र था। बाद में वह नौशेरवां-ए-आदिल के नाम से प्रसिद्ध हुआ।कहा जाता है कि जब खुसरो छोटा था, तो उसके पिता कोबाद के दरबार में सीरिया निवासी माजदक नामक व्यक्ति आया और उसने खुद को पैगंबर बताया। बादशाह कोबाद उसके विचार से बहुत प्रभावित हुआ। उसे अपना मंत्री और कोषाध्यक्ष बना दिया। माजदक ने बाहशाह को समझाया कि संपत्ति और महिलाओं पर सबका साझा अधिकार होना चाहिए। पुरुषों को इनसे कोई लगाव नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये दोनों ईर्ष्या, क्रोध, प्रतिशोध, लोभ और वासना जैसे पाँच दुर्गुणों को जन्म देते हैं।
कुछ ही दिनों में माजदक ने ईरान में अपने हजारों अनुयायी बना लिए जो समाज के निचले तबके के लोग थे। एक दिन माजदक ने बादशाह की पत्नी यानी खुसरो की माता पर अपना हक जताया। इसका खुसरो ने विरोध किया। माजदक ने बादशाह से खुसरो की शिकायत की। खुसरो ने अपने पिता से माजदक को विश्वासघाती और समाज के लिए बुरा आदमी बताया।
उन्होंने छह महीने में उसके खिलाफ सबूत पेश करने का भी दावा किया। कुछ ही दिनों में खुसरो ने सबूत के साथ माजदक का पर्दाफाश कर दिया। माजदक और उसे शिष्यों को मृत्युदंड दिया गया। पिता के बाद खुसरो ने 531 ईस्वी से 579 ईस्वी तक शासन किया। वे ईरान के सबसे प्रसिद्ध और सफल शासकों में से एक थे। शतरंज और बैकगैमोन जैसे खेलों की शुरुआत उनके शासनकाल में हुई थी। उनके शासनकाल में किसानों से लगान की वसूली भी खत्म कर दी थी।

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