अशोक मिश्रमार्च के साथ-साथ अप्रैल में भी पश्चिमी विक्षोक्ष के कारण उत्तर पश्चिमी और मध्य भागों में कुछ दिनों के अंतराल में बारिश हो रही है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में ओलावृष्टि भी हुई है। तेज रफ्तार से हवाएं भी चली हैं। अप्रैल महीने का पहला पखवाड़ा भी कुछ ही दिनों में बीत जाएगा। इसके बावजूद होने वाली बरसात से निजात मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
वैसे तो हरियाणा सरकार ने घोषणा की है कि प्रदेश की मंडियों में पहुंचने वाली फसलों को जरूर खरीदा जाएगा। प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने तो यहां तक घोषणा की है कि किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। लेकिन प्रदेश की मंडियों के जो हालात हैं, उसको देखते हुए ऐसा नहीं लगता है। हथीन अनाज मंडी की ही बात करें, तो मंगलवार को मंडी में किसानों द्वारा लाए गए गेहूं के 540 गेट पास तो काटे गए, लेकिन खरीद एजेंसी हरियाणा वेयर हाउस ने एक दाना गेहंू की खरीद नहीं की। यह स्थिति तो केवल एक बानगी है।
एजेंसी ने गेहूं की खरीद इसलिए नहीं की क्योंकि बेमौसमी बरसात के चलते गेहूं में नमी बढ़ गई थी और गेहूं के दाने का रंग भी बदल गया था। बेमौसमी बरसात के चलते किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। प्रदेश में जब भी बादल मंडराते हैं, तो किसानों के चेहरे रुआंसे हो जाते हैं। मौसम पर उनका कोई नियंत्रण भी नहीं है। जब-जब बरसात होती है, तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं। वह बेबस होकर अपनी मेहनत से उगाई गई फसल को बरबाद होते देखते हैं और मन मसोसकर रह जाते हैं।
जिन किसानों ने गेहूं की फसल काट ली है और अभी दाना नहीं निकाला है, उन किसानों को चिंता यह सता रही है कि दाने भीग गए, तो उनकी गुणवत्ता कम हो जाएगी। मंडियों में उन्हें कम दाम मिलेगा। दानों के अंकुरित हो जाने का खतरा भी पैदा हो गया है। यह समय कटाई का है। खेतों में खड़ी फसल तेज हवाओं और बारिश के चलते बिछ गई है। इससे पैदावार में 20-30 से लेकर 50-70 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। सरसों, चने और मटर की फसल को भी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से पहले ही भारी नुकसान पहुँच चुका है।
रह-रह कर बरसात होने की वजह से फसलों की कटाई में भी देरी हो रही है। उधर जो किसान किसी तरह अपनी फसल को लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं, उन्हें वहां भी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। कहीं नमी ज्यादा बताकर फसल खरीदी नहीं जा रही है, तो कहीं ज्यादा किसानों के आ जाने से उनका अनाज मंडी के बाहर खुले में पड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में यदि बारिश हो जाती है, तो उनकी फसलों को भीगना पड़ता है। उनकी कीमत भी भीगने की वजह से कम हो जाती है।

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