अशोक मिश्रसाइबर ठगों से पूरा देश त्रस्त है। देश का शायद ही कोई जिला हो, जहां रोज दो-चार साइबर ठगी की घटनाएं न हो रही हों। हरियाणा भी इससे अछूता नहीं है। सरकार, पुलिस और अन्य समाजसेवी संस्थाएं लोगों से साइबर ठगी के मामले में जागरूक होने की अपील करते हुए थक नहीं रही हैं, लेकिन लोगों के भीतर बैठा लालच उन्हें ठगों के चंगुल में फंसा रहा है। पुलिस जागरूकता अभियान चलाकर बार-बार समझा रही है कि अनजान वीडियो कॉल या व्हाट्सएप पर आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
ट्राई या सीबीआई के नाम पर डराने वाले कॉल से बिल्कुल न डरें। सरकारी संस्थाएं किसी भी व्यक्ति से फोन पर संपर्क नहीं करते हैं। वे कभी फोन पर जांच भी नहीं करते है। सरकार विभिन्न माध्यमों से बार-बार बताती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक विवरण, पिन या ओटीपी साझा न करें। इसके बावजूद लोग साइबर ठगी के शिकार हो जाते हैं। इसके पीछे लोगों की कम समय में ज्यादा धन कमाने की इच्छा भी है। किसी ने ह्वाट्सएप ग्रुप या किसी अन्य माध्यम से संपर्क किया।
चिकनी-चुपड़ी बातें की, पूंजी निवेश में ज्यादा मुनाफा का लालच दिखाया, तो उसके झांसे में आकर अपनी पूंजी सौंप दी। लोग अपने सगे भाई-बहनों, माता-पिता पर पैसे के मामले में विश्वास नहीं करते हैं, लेकिन पता नहीं कैसे अनजान व्यक्ति पर भरोसा कर लेते हैं। सरकारी एजेंसियां साइबर ठगी के खिलाफ लगातार कार्रवाई करती रहती हैं। सरकार ने 2025 में 6,300 से अधिक मामले दर्ज किए थे। 1.5 लाख से अधिक फर्जी सिम/मोबाइल ब्लॉक किया जा चुका है। 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से 40 प्रतिशत तक ठगी गई राशि को बैंक खातों में होल्ड/फ्रीज किया जा चुका है।
हरियाणा पुलिस पर बढ़ते विश्वास के परिणामस्वरूप पिछले वर्ष 2025 में कुल 1,41,685 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जो वर्ष 2024 की तुलना में 8.5 प्रतिशत अधिक थीं। गिरफ्तारी के मोर्चे पर वर्ष-2025 में हरियाणा पुलिस ने शानदार प्रदर्शन किया था। पिछले वर्ष कुल 8,022 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। औसतन 22 अपराधियों की गिरफ्तारी प्रतिदिन की गई। इन सख्त कार्रवाइयों का सीधा असर यह हुआ कि साइबर ठगी की कुल राशि 980 करोड़ से घटकर 630 करोड़ रुपये रह गई।
आंकड़े के आधार पर बात कही जाए, तो लोगों की 36 प्रतिशत जमा पंूजी को साइबर अपराधियों के खातों में जाने से रोका गया, जो प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपये के आसपास पहुंचता है। वर्ष 2025 की शुरुआत में हरियाणा पुलिस द्वारा अपनाई गई पांच सूत्रीय रणनीति के तहत साइबर अपराध के पूरे इकोसिस्टम पर प्रहार किया गया। इसके अंतर्गत 1.50 लाख से अधिक मोबाइल नंबर, 12,326 आईएमईआई और 5,123 फर्जी वेबसाइट/सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक किए गए।
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