Saturday, May 16, 2026

नेत्रहीन होकर भी बने महान संगीतकार

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

यदि मन में सच्ची लगन हो, तो कोई भी बाधा सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती है। दिव्यांग व्यक्ति भी सामान्य लोगों की तरह सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकता है। इसके सबसे बेहतरीन उदाहरण संगीतकार रवींद्र जैन थे। 

रवींद्र का जन्म 28 फरवरी 1944 को अलीगढ़ में हुआ था। जब उनका जन्म हुआ, तो उनके माता-पिता ने पाया कि उनका बेटा आंखें नहीं खोल रहा है। वह घबरा गए। उसको लेकर तुरंत नेत्र चिकित्सक के पास पहुंचे। चिकित्सक ने उनकी पलकों का आपरेशन तो कर दिया, लेकिन नेत्र ज्योति फिर भी नहीं आई। माता-पिता इससे निराश नहीं हुए। थोड़ा बड़ा होने पर उन्होंने अपने बेटे को हारमोनियम पकड़ा दिया। 

घर पर ही संगीत की शिक्षा दी जाने लगी। अलीगढ़ के ही दृष्टिबाधित स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद संगीत की उच्च शिक्षा के लिए कलकत्ता चले गए। दस वर्ष तक कठिन परिश्रम से हासिल हुई शिक्षा का उपयोग वह रेडियो स्टेशन पर गाने के लिए आडिशन देने लगे। 

कुछ समय तक रवींद्र जैन ने भजन भी गाए। रोजगार के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया और सन 1972 में वह फिल्मों में गाने लगे। भारत में सबसे प्रसिद्ध माने जाने वाले रामानंद सागर निर्देशित सीरियल रामायण  में संगीत देने के बाद तो वह घर-घर में पहचाने जाने लगे। 

रवींद्र जैन को सन 1985 में फिल्म राम तेरी गंगा मैली के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार भी मिला है। वर्ष 2015 में उनको पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह महान संगीतकार और गीतकार 9 अक्टूबर 2015 को 82 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गया। उनका संगीत आज भी अमर है।

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