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Sunday, August 9, 2026

हरियाणा में आपराधिक गिरोहों की बढ़ती सक्रियता से हाईकोर्ट चिंतित

अशोक मिश्र

हरियाणा के विभिन्न जिलों में आपराधिक गिरोहों और उनके स्लीपर सेल की सक्रियता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार के सामने काफी चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम जैसे जिलों में सक्रिय आपराधिक गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए, इसका विस्तृत ब्यौरा राज्य सरकार से मांगा है। हरियाणा में संगठित अपराध का इतिहास कोई बहुत पुराना नहीं है। पहले राज्य में असंगठित अपराध जरूर छिटपुट पढ़ने-सुनने को मिल जाते थे। 

अस्सी और नब्बे के दशक तक यहाँ अपराध मुख्य रूप से जमीन विवाद, आपसी रंजिश और जातिगत वर्चस्व तक सीमित था। ज्यादातर अपराध आनर किलिंग की वजह से होते थे। लेकिन पिछले दो दशक में जैसे-जैसे राज्य का औद्योगिक विकास होता गया, संगठित गिरोहों ने अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दीं। एनसीआर के विस्तार, रियल एस्टेट में अकूत पैसे के आने और राजनीतिक संरक्षण ने इसे पेशेवर गैंगस्टरवाद में बदल दिया। गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, झज्जर, सोनीपत और पानीपत जैसे जिले इस बदलाव के केंद्र बने, जहाँ जमीन की कीमतें रातों-रात करोड़ों में पहुँच गईं और कब्जा, वसूली और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग एक उद्योग बन गया। 

इस हालात ने अपराध के नए अर्थशास्त्र को जन्म दिया। राज्य में पैदा होने वाले आपराधिक गिरोहों ने शुरुआती दौर में पंजाब, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय गिरोहों की कार्यशैली को अपनाया।  हरियाणा और दूसरे राज्यों में सक्रिय गैंग्स की अर्थव्यवस्था चार स्तंभों पर टिकी होती है। पहला है जमीन पर जबरन कब्जा और प्रॉपर्टी विवादों में किसी एक पक्ष के लिए हथियारबंद मदद देना। दूसरा है व्यापारियों, बिल्डरों, शराब ठेकेदारों और बड़े किसानों से रंगदारी वसूलना। 

इनकार करने पर उनको डराना-धमकाना और जरूरत पड़ने पर हत्या कर देना। तीसरा है हथियारों की तस्करी, जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होती है। चौथा है सोशल मीडिया पर दहशत का प्रचार करना। सोशल मीडिया पर इनका जितना प्रचार होता है, वह अपनी पकड़ उतनी ही मजबूत करते चलते हैं। हरियाणवी गैंगस्टर खुद सामने आने के बजाय इंस्टाग्राम, फेसबुक पर हथियारों के साथ फोटो, गैंगस्टर रैप गानों और लाइव वीडियो के जरिए अपना खौफ बनाते हैं। 

यह कम उम्र के युवाओं को बहुत आकर्षित करता है, जो जल्दी पैसा, नाम और पहचान की चाह में इस रास्ते पर आ जाते हैं। राज्य सरकार और पुलिस ने इस चुनौती से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कड़ी मेहनत की है। सरकार ने हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स, साइबर सेल और स्पेशल सेल को मजबूत करके कई बड़े एनकाउंटर किए हैं। विदेशों में बैठे गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के प्रयास और गैंगस्टरों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की है।