Saturday, February 28, 2026

खनन मामले में सुप्रीमकोर्ट लेगा पहले विषय विशेषज्ञों की राय


अशोक मिश्र

अरावली पर्वत माला के संबंध में सुप्रीमकोर्ट ने बिलकुल उचित ही कहा है कि जब तक विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं आ जाती है, तब तक अरावली क्षेत्र में सारी गतिविधियों को यथावत रखा जाए। गुरुवार को अरावली मामले की सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया कि कोर्ट इस बारे में विशेषज्ञों की राय लेगा कि अरावली क्षेत्र में खनन की इजाजत दी जा सकती है या नहीं। 

यदि खनन की इजाजत दी जा सकती है तो किस स्तर तक खनन की इजाजत दी जा सकती है। अरावली क्षेत्र में होने वाले खनन की देखरेख का जिम्मा किसका रहेगा,यह भी तय करना बहुत जरूरी है। बहरहाल, सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट अपने पुराने फैसले की भी समीक्षा करेगा। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट ने जो कहा है, उससे लगता है कि अरावली क्षेत्र में खनन के मामले को लेकर कोर्ट पूरी तरह गंभीर है और जब तक वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाएगा, देखरेख की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाएगी, तब तक वह किसी प्रकार की इजाजत नहीं देगा। 

सुप्रीमकोर्ट के रवैये से पर्यावरण प्रेमी और अरावली को बचाने की मुहिम में लगे लोगों को बहुत बड़ी राहत मिली है।  पिछले साल के नवंबर महीने में सुप्रीमकोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति द्वारा सुझाई गई परिभाषा को स्वीकार कर लिया था। नई परिभाषा के अनुसार, वही पहाड़ियां अरावली क्षेत्र के अंतर्गत मानी जाएंगी जिसकी स्थानीय ऊंचाई सौ मीटर या उससे अधिक हो। साथ ही दो या दो से अधिक ऐसी पहाड़ियों के पांच सौ मीटर के दायरे में होने पर ही उन्हें अरावली क्षेत्र में माना जाएगा। 

बाद में इस नई परिभाषा को लेकर विवाद पैदा हो गया। गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में इसके विरोध में प्रदर्शन होने लगे। कुछ लोगों ने एक बार फिर अरावली क्षेत्र को बचाने के लिए सुप्रीमकोर्ट की ही शरण ली। इसका फायदा भी हुआ। अदालत ने अपने ही फैसले पर रोक लगाते हुए सुनवाई शुरू की है। इस बार की सुनवाई में हर पहलू पर खुद शीर्ष अदालत ध्यान दे रही है। वैसे यह बात सही है कि पिछले कुछ दशकों से अरावली क्षेत्र में अवैध खनन और पेड़ों की कटान की वजह से यहां का जलवायु संतुलन गड़बड़ा गया है। 

इसका कारण अरावली क्षेत्र में दिनोंदिन बढ़ता अतिक्रमण, वनों की अवैध कटाई, अवैध खनन और शहरी संरचना का बढ़ता क्षेत्रफल माना जा रहा है। पिछले दिनों अरावली के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर सांकला फाउंडेशन में शोध किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध खनन, वनों की कटाई और अरावली के इर्द-गिर्द किए गए पक्के निर्माणों ने भूजल रिचार्ज, जैव विविधता, वायु गुणवत्ता और जलवायु संतुलन पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला है जिसकी वजह से अरावली पर्वत माला के पारिस्थितिक तंत्र बुरा असर डाला है। 

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