बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
डॉ. राम मनोहर लोहिया को समाजवादी विचारक माना जाता है। उनका जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर जिले में मारवाड़ी बनिया परिवार में हुआ था। जब वह दो साल के थे, तो उनकी माता का निधन हो गया। स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने वाले उनके पिता हीरा लाल लोहिया ने दूसरा विवाह करने की जगह अपने बेटे के पालन पोषण का जिम्मा लिया।लोहिया ने बीएचयू से इंटरमीडिएट परीक्षा पास की और 1929 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले विद्यासागर कालेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह इंग्लैंड चले गए, लेकिन वहां का वातावरण रास नहीं आया। तो वह जर्मनी के हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र में पीएडी करने चले गए। इस दौरान लोहिया का अपने पिता से पत्रों के माध्यम से संपर्क बना रहा।
उनके पिता भारत में अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे अत्याचार के बारे में अपने पत्रों में जिक्र किया करते थे। इससे लोहिया के मन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ रोष पैदा होता चला गया। उसी दौरान एक घटना घटी। उन्हीं दिनों जिनेवा में लीग आफ नेशन्स का अधिवेशन आयोजित किया गया। इस अधिवेशन में कई देशों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत से बीकानेर के महाराज भी अधिवेशन में भाग लेने पहुंचे।
अधिवेशन में अंग्रेजी शासन की जमकर प्रशंसा की गई, इस बात को लोहिया बरदाश्त नहीं कर पाए और उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों की फांसी का उल्लेख किया। इससे दुनिया भर में अंग्रेजी हुकूमत की सच्चाई सबके सामने आई। भारत आने के बाद लोहिया ने स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी और समाजवादी विचारधारा को प्रसारित किया।

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