अशोक मिश्रहरियाणा में ऑनलाइन गेम्स का जाल फैलता जा रहा है। इससे काफी परिवार बरबाद हो रहे हैं। आनलाइन गेमिंग की लत में लोग अपनी जमा पूंजी तक लुटा रहे हैं। आनलाइन गेम अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्या बन चुका है। गांव के खेतों से लेकर शहरों के दफ्तरों, खेल के मैदानों, घर और अन्य जगहों पर युवा अपने मोबाइल पर दिन-रात गेम खेलते दिखते हैं। शुरुआत में यह शौक छोटे-मोटे इनाम और टाइमपास के लिए होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत में बदल जाता है जहां व्यक्ति अपनी पूरी कमाई, बचत और फिर उधार लिया पैसा भी दांव पर लगा देता है।
जब हार का कर्ज सिर पर चढ़ता है और वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता तो कई लोग गहरे अवसाद में चले जाते हैं और कुछ तो आत्महत्या जैसा कठोर कदम भी उठा लेते हैं। फरीदाबाद एक व्यक्ति ने आनलाइन गेमिंग की लत के चक्कर में अपनी पूरी तनख्वाह दो घंटे में गंवा दी। इसके साथ ही उस पर पचास हजार रुपये का कर्ज भी हो गया। इस हताशा में उसने मंगलवार शाम को अगस्त क्रांति एक्सप्रेस के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। आत्महत्या करने वाला व्यक्ति काफी दिनों से कर्ज की वजह से परेशान था।
उसकी पत्नी ने उसे समझाया भी था कि वह दोनों मिलकर धीरे-धीरे कर्ज चुका देंगे। बस, उसे आनलाइन गेम खेलना बंद करना होगा। इसके बावजूद उस व्यक्ति की गेम खेलने की आदत नहीं छूटी। इस प्रवृत्ति के बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे पहला कारण है स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट की हर हाथ तक पहुंच। हरियाणा में बेरोजगारी और अर्द्ध-बेरोजगारी के कारण बहुत से युवाओं के पास समय तो है पर स्थिर आय का साधन नहीं, ऐसे में जल्दी पैसा कमाने का लालच उन्हें इन गेम्स की ओर खींचता है।
हरियाणा में सबसे ज्यादा प्रचलित गेम्स दो तरह के हैं। एक तरफ कौशल के नाम पर खेले जाने वाले पैसे वाले गेम्स हैं तो दूसरी तरफ बैटल रॉयल और युवाओं में लोकप्रिय गेम्स हैं। इन घटनाओं को रोकने के लिए केवल सरकार ही नहीं बल्कि परिवार और समाज को भी मिलकर काम करना होगा। परिवारों को चाहिए कि वे बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखें। उनके बैंक लेन-देन की जानकारी रखें और खुलकर पैसे के बारे में बात करें। स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल लिटरेसी और वित्तीय साक्षरता के बारे में बताया जाए कि कैसे ये गेम्स लत बनाते हैं।
जो व्यक्ति कर्ज में फंस गया है, उसे अकेला छोड़ने के बजाय मनोवैज्ञानिक परामर्श और नशा मुक्ति केंद्रों जैसी सहायता देनी होगी, ताकि वह शर्म के कारण आत्महत्या की ओर न जाए। अगर समय रहते समाज, परिवार और सरकार ने मिलकर इस आॅनलाइन जुए की लत पर काबू नहीं पाया तो यह मेहनती युवाओं की कमाई और भविष्य दोनों को निगल जाएगी।
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