बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है। यह प्रकृति का नियम है। इस नियम में कोई अपवाद नहीं है। लाखों-करोड़ों साल से जीव-जंतु पैदा होते आ रहे हैं, अपना जीवन बिताकर इस असार संसार से विदा लेते रहे हैं। भविष्य में भी ऐसा ही क्रम चलता रहेगा। इसमें किसी प्रकार के बदलाव की रंचमात्र संभावना नहीं है।हालांकि मनुष्य सदियों से अपने को अमर बनाने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन अभी तक यह संभव नहीं हो पाया है। एक बार की बात है। गौतमी नाम की महिला का इकलौते बेटे की किसी कारणवश मृत्यु हो गई। वह अपने बेटे को बहुत प्यार करती थी। वैसे तो यह हर मां का गुण है, वह अपनी संतान को सबसे ज्यादा प्यार करती है। बेटे की मृत्यु पर वह एकदम विक्षिप्त सी हो गई। किसी से गौतमी ने सुना कि महात्मा बुद्ध उसके नगर में आए हुए हैं। उसने सुन रखा था कि महात्मा बुद्ध चमत्कारी हैं। वह अगर चाहें तो उसके बेटे को जिंदा कर सकते हैं।
यह सुनते ही वह तत्काल उठी और उस जगह जा पहुंची जहां तथागत मौजूद थे। वह जाकर बुद्ध के चरणों में गिर पड़ी और रो-रोकर विनती करने लगी कि उसके बेटे को फिर से जिंदा कर दें। बुद्ध ने उसे समझाया कि उसके बेटे को अब जिंदा कर पाना संभव नहीं है। तब भी वह नहीं मानी। फिर बुद्ध ने गौतमी से कहा कि वह किसी ऐसे घर से एक लोटा जल ले आए तो वह उसे अभिमंत्रित करके उसके बेटे को जीवित कर देंगे।
गौतमी नगर और गांव में दिन भर भटकी, लेकिन उसे एक लोटा पानी नहीं मिला क्योंकि कोई घर ऐसा नहीं था जिस घर में मौत न हुई हो। वह हताश निराश बुद्ध के पास लौट आई। बुद्ध ने समझाया कि मृत्यु सबकी निश्चित है, बस समय अलग-अलग है। गौतमी का मोह भंग हुआ। अगले दिन उसने अपने बेटे का अंतिम संस्कार किया और लोक कल्याण में आजीवन लगी रही।
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