Sunday, January 4, 2026

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ मुहिम से सुधरा हरियाणा में लिंगानुपात

अशोक मिश्र

हरियाणा के संदर्भ में बहुत दिनों बाद एक अच्छी खबर पढ़ने-सुनने को मिली। काश कि भविष्य में भी यह प्रक्रिया इसी तरह चलती रहे। हरियाणा ने वर्ष 2024 के मुकाबले में वर्ष 2025 में लिंगानुपात के मामले में 13 अंकों की बढ़ोतरी हासिल की। वर्ष 2025 में लिंगानुपात का आंकड़ा 923 पहुंचा है। सच कहा जाए, तो यह आंकड़ा भी कम है, लेकिन राज्य ने लिंगानुपात के मामले में जिस मील के पत्थर को पार किया है, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि वह लिंगानुपात के मामले में आगे ही बढ़ता रहेगा। 

जिस प्रदेश को आज से कई दशक पहले तक कुड़ीमार प्रदेश कहा जाता था, उस संदर्भ में देखें, तो यह उपलब्धि गौरवान्वित करने वाली है। यह उपलब्धि बता रही है कि अब राज्य के लोगों की मानसिकता बदल रही है। वह अब अपनी लड़कियों को लेकर सकारात्मक ढंग से सोचने लगे हैं। उन्हें अब बेटियां-बहनें बोझ नहीं लगती हैं। जिस तरह राज्य की लड़कियां आगे बढ़कर हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल करती जा रही हैं, खेलकूद, पढ़ाई-लिखाई में वह उत्तरोत्तर आगे बढ़ती जा रही हैं। 

अच्छे अंकों से परीक्षाएं पास कर रही हैं, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में मेडल हासिल कर रही हैं, उससे लोगों को अपनी बहन-बेटियों पर गर्व हो रहा है। अंतरमन में जरूर उन्हें अपने पूर्वजों की बेटियों को जन्म लेते ही मार देने की प्रवृत्ति पर अफसोस हो रहा होगा। वैसे भी समाज को आगे बढ़ाने के लिए स्त्री की जरूरत होती है। प्रकृति ने यह गुरुत्तर दायित्व स्त्रियों को ही सौंप रखा है। ऐसी स्थिति में यदि लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले में कम रह गई, तो स्वाभाविक तौर पर कुछ लड़के कुंवारे रह जाएंगे। 

यह भी एक तरह की सामाजिक विकृत्ति है, जिस तरह लड़कियों की संख्या का कम होना एक सामाजिक बुराई है। संतोष की बात यही है कि अब जनमानस में  लड़कियों को लेकर चेतना पैदा हो चुकी है। लिंगानुपात सुधार में सबसे अहम भूमिका बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की मानी जा रही है। जब से यह मुहिम शुरू हुई है, लोग ने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। प्रदेश सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं ने इसका प्रचार भी बहुत किया है। पूरे प्रदेश में जहां भी जाइए, आपको बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के स्लोगन लिखे हुए मिल जाएंगे। जब कोई बात या विचार बार-बार आंखों के सामने आता है, तो वह मन के दरवाजे पर दस्तक जरूर देता है। 

वैसे भी लिंगानुपात में सुधार के लिए अवैध गर्भपात को रोकने के लिए राज्य सरकार ने कठोर कदम उठाए हैं। गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करके अवैध गर्भपात पर एक तरह से रोक लगा दी है। सरकार ने एएनएम, आशा वर्कर्स आदि की जिम्मेदारी भी तय कर दी थी। इसका भी लिंगानुपात मामले में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

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