Tuesday, January 6, 2026

संभलकर करें पानी का उपयोग हरियाणा में गहरा रहा जल संकट


अशोक मिश्र

जल ही जीवन का आधार है। जल के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। लेकिन विडंबना यह है कि जिन जगहों पर पानी की उपलब्धता अधिक है, वहां लोगों में पानी की कोई कद्र ही नहीं है। पानी का दुरुपयोग इन जगहों पर आम बात है, लेकिन जिन जगहों पर पानी की उपलब्धता कम है, वहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। हरियाणा में भी पानी की उपलब्धता कफी कम है। राज्य में वर्तमान समय में 35 लाख करोड़ लीटर पानी की मांग बनी हुई है। लेकिन सारे प्रयास करने के बावजूद सिर्फ  21 लाख करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति हो पा रही है। बाकी बचे 14 लाख करोड़ पानी की आपूर्ति के लिए राज्य सरकार कई तरह के प्रयास कर चुकी है और आज भी कर रही है। 

ऐसी स्थिति में लोगों को पानी खर्च करने के मामले में मितव्ययता से काम लेना चाहिए। हरियाणा में करीब 86 प्रतिशत पानी की खपत खेती के काम में होती है। 14 प्रतिशत पानी पीने के काम में आता है। सरकार का फोकस ऐसी फसलों का उत्पादन घटाने की तरफ बन रहा है, जिनमें पानी की अधिक खपत होती है। प्रदेश सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है कि वह एक तो प्राकृतिक खेती की ओर लौटें और दूसरे वह उन्हीं फसलों की खेती करें जिसमें पानी की खपत कम से कम होती है। खेती में पानी का सबसे ज्यादा उपयोग होने की वजह से प्रदेश के कई जिले डार्क जोन में आ गए हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सीएम सैनी ने राज्य में जल शक्ति अभियान को गति देने का निर्णय लिया है। 

केंद्र सरकार के सहयोग से कैच द रेन 2025 जैसे अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण और वन संरक्षण पर जोर दिया जा चुका है। पानी बचाने के लिए इन योजनाओं को पहले ही जल जीवन मिशन के साथ जोड़ा जा चुका है। सैनी सरकार ने वाटर सिक्योर हरियाणा कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व बैंक की मदद से 5700 करोड़ रुपये की योजना पर काम चालू कर दिया है। इस योजना के तहत राज्य को 2032 तक देश का पहला जल सुरक्षित राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 14 रणनीतिक सिंचाई क्लस्टर शामिल हैं। हरियाणा में पानी की बर्बादी रोकना केवल सरकार का ही काम नहीं है। 

इस जनभागीदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रदेश के हर व्यक्ति को इस बात का एहसास होना चाहिए कि पानी की बूंद-बूंद बचाना उनका भी दायित्व है। जल संरक्षण के लिए सरकार ने कानून और नीतियां बनाई हैं। इनमें हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) अधिनियम 2020 प्रमुख है, जो जल संरक्षण को अनिवार्य बनाता है। अधिनियम में पानी की चोरी और बर्बादी पर जुर्माना लगाने और कनेक्शन काटने का प्रविधान किया गया है। सरकारी तंत्र के बार-बार समझाने के बाद भी जो लोग पानी की आवश्यकता को नहीं समझ पा रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

No comments:

Post a Comment