Sunday, January 4, 2026

आप मेरी झोपड़ी नहीं देख सकते क्या?

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

धन का अहंकार हो या सत्ता का, कभी अच्छा नहीं माना गया है। धन हो या सत्ता इस दुनिया में किसी के पास स्थायी नहीं रही है। धन या सत्ता आज है, कल कोई दूस
रा उसका मालिक हो जाएगा। इसलिए किसी भी स्थिति में अहंकार को अच्छा नहीं माना गया है। अरब देश में कोई राजा था। वैसे वह बड़ा दयालु और प्रजापालक था। वह अपनी प्रजा का बहुत ख्याल रखता था। मृदुभाषी भी था। 

एक बार की बात है। वह अपने राज्य में एक बार घूमने निकला। उसे एक जगह बहुत पसंद आई। उसने उस जमीन पर अपना महल बनाने का फैसला किया। उसने जिस स्थान पर महल बनाने का निर्णय लिया था, उस जमीन के मालिकों को अच्छे दाम देकर जमीन खरीद ली। बस एक छोटा सा टुकड़ा बचा था जिसकी मालकिन एक बुजुर्ग महिला थी। वह अपनी उस जमीन पर झोपड़ी बनाकर रहती थी। 

बाकी बची जमीन पर थोड़ा बहुत कुछ अनाज सब्जी उगाकर अपना गुजारा करती थी। जब महल बनकर तैयार हुआ, तो राजा बहुत खुश हुआ। लेकिन सुबह उठने के बाद जब भी वह और उसके परिवार वाले महल के बगल में बनी झोपड़ी को देखते तो उन्हें बहुत बुरा लगता था। राजा ने अपने दरबारियों को उस बुजुर्ग महिला को समझाने को भेजा, लेकिन वह नहीं मानी तो उसे दरबार में तलब किया। 

राजा ने उस बुजुर्ग महिला से कहा कि मैं चाहता तो आपकी जमीन छीन सकता था। उस महिला ने जवाब दिया, आप राजा हैं। आपके पास शक्ति है। उस शक्ति का उपयोग मुझ जैसी शक्तिहीन पर करना क्या आपको शोभा देता। जब मैं आपके महल को रोज देख सकती हूं, तो क्या आप मेरी झोपड़ी को नहीं देख सकते। यह सुनकर राजा बहुत लज्जित हुआ। उसने ससम्मान महिला को वापस भेज दिया।

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