Saturday, April 11, 2026

अरावली क्षेत्र में अवैध खनन से बनी कृत्रिम झीलें साबित हो रही जानलेवा


अशोक मिश्र

अरावली क्षेत्र में अवैध खनन एक गंभीर समस्या है। सुप्रीमकोर्ट, राज्य सरकार और पर्यावरण प्रेमी इसको लेकर चिंतित हैं। सुप्रीमकोर्ट और राज्य सरकार खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आदेश दे चुकी है। इसके बावजूद अवैध खनन नहीं रुक पा रहा है। कहा जाता है कि सन 1990 के बाद से अब तक मेवात, गुरुग्राम और फरीदाबाद जिले में खनन माफियाओं ने पांच सौ एकड़ से अधिक घने जंगल, कई पहाड़ियां और 120 से अधिक प्राकृतिक झरनों और तालाबों को नष्ट कर दिया है। 

अवैध खनन के चलते अरावली क्षेत्र में भारी संख्या में कृत्रिम झीलों का निर्माण हो गया है। इन कृत्रिम झीलों की देख रेख में भी लापरवाही बरती जा रही है जिसकी वजह से पिछले सोलह साल में सौ से अधिक लोग इन कृत्रिम झीलों में डूबने से अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले मंगलवार को ही बल्लभगढ़ के थाना धौज क्षेत्र के सिरोही झील में डूबने से बीस वर्षीय युवक की मौत हो गई। सोशल मीडिया पर इस कृत्रिम झील के सौंदर्य के बारे में पढ़कर युवक यहां घूमने आया था। 

युवक को कतई यह अंदाजा नहीं था कि जिस कृत्रिम झील के सौंदर्य को देखकर वह मुग्ध हो रहा है, वही उसके लिए जानलेवा साबित होने वाली है। बिना कुछ सोचे-समझे झील में तैरने के लिए कूदना जानलेवा साबित हुआ। फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड के किनारे ही कम से कम छह कृत्रिम झीलें बन गई हैं। वन विभाग या स्थानीय प्रशासन की ओर से इन कृत्रिम झीलों के किनारे किसी तरह की चेतावनी देने वाला बोर्ड भी नहीं लगा है। इन झीलों के चारों ओर तारबंदी भी नहीं की गई है। 

यहां पर किसी कर्मचारी को तैनात भी नहीं किया गया है, ताकि वह यहां आने वाले लोगों को सचेत कर सके। जब यहां कोई आता है, तो वह सोशल मीडिया पर इन झीलों के बारे में बहुत ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर फोटो और वीडियो डालते रहते हैं जिससे प्रभावित होकर युवा इन झीलों के आसपास पिकनिक मनाने चले आते हैं। गर्मियों के दिनों में तो युवा बिना झीलों की गहराई का पता किए तैरने लगते हैं जिसकी वजह से वह हादसे का शिकार हो जाते हैं।  

अवैध खनन की वजह से बनी इन कृत्रिम झीलों के आसपास चेतावनी बोर्ड लगाने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को तारबंदी करनी चाहिए ताकि हादसों को रोका जा सके। इसके साथ ही पूरे अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। अवैध खनन के चलते ही प्राकृतिक तालाब और झरने खत्म हो गए हैं, जिससे क्षेत्र मरुस्थल में बदल रहा है। 

नांगल चौधरी जैसे क्षेत्रों में पानी एक हजार फीट नीचे चला गया है। हरियाली खत्म हो रही है और जड़ी-बूटियां लुप्त हो रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले नूंह के एक क्षेत्र में 41 लाख मीट्रिक टन से अधिक अवैध खनन से 22 अरब रुपये का नुकसान हुआ।


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