Wednesday, July 8, 2026

शहरी जीवन की सबसे बड़ी कमजोरी है खुले में कचरा फेंकने की आदत

 
अशोक मिश्र

हरियाणा में मानसूनी बरसात होने लगी है। बरसात होने के बाद लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन सड़कों और गलियों में भरे पानी ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। सड़कों पर बने गड्ढे और गाद से भरी नालियों की वजह से बरसाती पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तीन महीने पहले ही स्थानीय निकायों को निर्देश दिया था कि प्रत्येक जिलों में नाले, नालियों की सफाई मानसून आने से पहले कर ली जाए ताकि किसी भी इलाके में जलभराव जैसी समस्या का सामना न करना पड़े। 

मुख्यमंत्री के आदेश पर कितना अमल किया गया, इसके पता राज्य के कई जिलों की सड़कों और गलियों में जमा हुआ पानी दे रहा है। नालियों में गाद के अलावा सड़कों पर फेंका गया कूड़ा-करकट बहकर इन नालियों में भर गया है जिसकी वजह से हालात और खराब हो गए हैं। हरियाणा में स्वच्छता के मानकों पर फरीदाबाद, पलवल, और कैथल सबसे फिसड्डी (फेल) साबित हुए हैं। राज्यव्यापी स्वच्छता सर्वेक्षण और केंद्र की रिपोर्ट में इन शहरों में कूड़ा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई पाई गई है। 

हरियाणा विकास और औद्योगिक प्रगति के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है, लेकिन जब बात स्वच्छता की आती है तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है। स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छ सर्वेक्षण की रिपोर्टें हर साल यही बताती हैं कि हरियाणा के कई शहर स्वच्छता के बुनियादी मानकों पर भी खरे नहीं उतर पा रहे। कचरा निपटान, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, नालियों की सफाई और खुले में कचरा फेंकने की आदतें आज भी हमारे शहरी जीवन की सबसे बड़ी कमजोरी बनी हुई हैं। 

राज्य के कई जिलों में हालत यह है कि कई दिनों तक कूड़ा पड़ा सड़ता रहता है, लेकिन उस कचरे का निपटान नहीं होता है। लोगों की आदत भी यह है कि वह अपने घर का कूड़ा सड़कों पर फेंक देते हैं जिसको आसपास रहने वाले लावारिस पशु और कुत्ते बिखरा देते हैं। जब तक सड़क पर कचरा फेंकना, सार्वजनिक जगहों को गंदा करना बंद नहीं होगा, तब तक स्थानीय निकाय चाहे जितनी कोशिश कर लें, स्वच्छता के मामले में रैंकिंग उच्च नहीं रहने वाली है। कई जिलों में सुबह झाड़ू लगती है और दोपहर तक वही कचरा फिर सड़क पर लौट आता है। स्वच्छता कोई एक दिन का अभियान नहीं है। 

यह रोज की आदत और प्रशासनिक अनुशासन मांगती है। सबसे पहले नगर निकायों को अपने सिस्टम को दुरुस्त करना होगा। उसके बाद नागरिकों को भी अपनी आदत में सुधार लाना होगा ताकि राज्य की सड़कों, गलियों और कालोनियों को स्वच्छ रखा जा सके। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक स्वच्छता रैंकिंग में हरियाणा को उच्च रैंक हासिल नहीं हो सकता है। इससे प्रदेश की छवि को भी बट्टा लगता है।

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