अशोक मिश्र
प्रकृति परिवर्तनशील है। हर समय प्रकृति में बदलाव होता रहता है। जिस वस्तु का आज अस्तित्व है, कल वह मिट जाएगा। स्वयं प्रकृति भी परिवर्तनशील है। जो बच्चा आज पैदा हुआ है, एक दिन जवान होगा, फिर अधेड़ और एक दिन बूढ़ा होकर मर जाएगा। यह प्रकृति का नियम है। इस बात को एक बूढ़ा राजा नहीं समझ पाया।बूढ़ा राजा काफी समय से बीमार रहने लगा। उसने काफी उपचार भी करवाया। कई वैद्य आए, लेकिन उसकी बीमारी को ठीक नहीं कर सके। राजा दिनोंदिन अपने जीवन को लेकर निराश होता जा रहा था। उन्हीं दिनों दरबार में एक ज्योतिषी आया। उसने राजा की हालत देखकर घोषणा की कि राजा की आयु केवल एक माह ही शेष है। यह सुनकर राजा और चिंतित हो गया।
संयोग से एकाध दिन बाद संतों का एक समूह उधर से जा रहा था। उसने सोचा कि राजा से ही मिल लिया जाए। मिलने पर राजा ने अपनी सारी पीड़ा बताई, तो एक संत ने कहा कि आपकी तो लंबी आयु है। राजा ने पूछा कि कैसे? तो संत उसे एक जुलाहे के पास ले गए। संत ने जुलाहे से कहा कि माना कि तुम कपड़ा बुनते हो, लेकिन कपास के अस्तित्व को क्यों बिगाड़ देते हो?
जुलाहा बोला, यदि मैं कपास का अस्तित्व नहीं बिगाड़ूं, तो कपड़ा कैसे बुनूंगा? कपास का अस्तित्व कुछ दिन बाद प्रकृति वैसे ही बिगाड़ देती। मैं कपास का अस्तित्व मिटाकर समाज के उपयोग में आने वाला कपड़ा बुनता हूं। तब संत ने राजा को समझाया कि ठीक इसी प्रकार एक दिन यह शरीर भी नष्ट हो जाएगा तो क्यों न इसका उपयोग किया जाए।
यह सुनकर राजा समझ गया कि संत उसे क्या समझाना चाहते हैं। उसने उसी दिन से चिंता करना छोड़ दिया और स्वस्थ हो गया।
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