अशोक मिश्र
इन दिनों बरसात का मौसम और सफाई कर्मियों की हड़ताल दोनों हरियाणा के लिए मुसीबत साबित हो रही है। सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। सड़कों पर कचरा फैला हुआ है। इनसे उठने वाली बदबू से जीना मुहाल हुआ जा रहा है। वहीं बरसात की वजह से हालत और बदतर हो गई है। नालियां जहां उफनाई हुई हैं, वहीं जगह-जगह जलभराव होने से परेशानी और बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में कई तरह के रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार जलभराव, बढ़ी हुई नमी, दूषित पेयजल और मच्छरों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण बीमारियां सबसे ज्यादा फैलती हैं।मच्छर जनित रोगों का खतरा ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा होता है जिसमें डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया प्रमुख हैं। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन के समय काटता है और साफ पानी में पनपता है, जबकि मलेरिया परजीवी से होने वाला रोग है। पानी और भोजन के जरिए फैलने वाले रोगों में टाइफाइड, हैजा, डायरिया, हेपेटाइटिस ए, पीलिया और पेट के संक्रमण शामिल हैं। दूषित पानी के सीधे संपर्क से होने वाले रोगों में लेप्टोस्पायरोसिस और त्वचा रोग सबसे अहम हैं।
लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु रोग है जो बारिश में गंदे पानी और जानवरों के मलमूत्र के संपर्क से फैलता है। कूलर, पानी की टंकियां, गमले, टूटे बर्तन, पुराने टायर और निमार्णाधीन मकानों में जमा पानी मच्छरों के पनपने के सबसे बड़े ठिकाने बनते हैं। गंदे पानी में सीवर का मिश्रण होने से ऐसे संक्रमण बड़ी तेजी से बढ़ते हैं। कचरे के ढेर से मक्खियां भी बढ़ती हैं, जो भोजन को दूषित कर संक्रमण फैलाती हैं। त्वचा संबंधी संक्रमण और सांस की तकलीफ भी बढ़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है और मच्छर जनित रोगों पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। घर-घर लार्वा जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। फॉगिंग, ड्राई डे अभियान और जागरूकता कार्यक्रम जारी हैं। अस्पतालों में बाढ़ और गर्मी संबंधी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। दवाओं, ओआरएस और आपातकालीन टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर है। डेंगू और मलेरिया के मामलों की रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। सरकार बरसाती बीमारियों से निपटने के लिए सतर्क है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का स्तर मिश्रित है। कई जिला अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन और डायलिसिस जैसी सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं। मुफ्त इलाज की योजनाओं के तहत गंभीर बीमारियों का उपचार उपलब्ध है। फिर भी कुछ जगहों पर डॉक्टरों की कमी, बुनियादी ढांचे की समस्या और भारी बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। प्रदेश को इस चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।