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Wednesday, July 15, 2026

ज्ञान, धन और विश्वास की कथा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

दुनिया में सबसे अमूल्य है विश्वास। एक बार किसी का विश्वास टूट जाए, तो फिर दोबारा विश्वास कायम नहीं होता है। यही वजह है कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में विश्वास को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। विश्वास कायम रखना, एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इस संदर्भ में एक बहुत पुरानी कथा है। कहते हैं कि ज्ञान, धन और विश्वास नामक तीन मित्र थे। तीनों में प्रगाढ़ मित्रता थी। 

एक बार उन्होंने तय किया कि किसी मूल्यवान वस्तु की खोज की जाए। तो फिर क्या था? तीनों अपनी यात्रा पर निकल पड़े। काफी दूर-दूर तक भटकने के बाद एक राज्य में पहुंचे। उस राज्य के राजा के सामने तीनों मित्र खड़े हुए। राजा ने तीनों का परिचय पूछा, तो सबसे पहले ज्ञान आगे आया। उसने राजा और दरबारियों को ज्ञान की बहुत सारी बातें बताईं। 

राजा ज्ञान की बातों से बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद धन की बारी आई। उसने राजा और दरबारियों के सामने ढेर सारा धन प्रस्तुत किया। सभी इतना धन देखकर धन से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने धन का ज्ञान से भी बढ़कर सम्मान किया। विश्वास की वेशभूषा भी बहुत साधारण थी। उसने लोगों को अपनी बातों से विश्वास दिलाना चाहा लेकिन कोई प्रभावित नहीं हुआ। 

कुछ समय बाद तीनों मित्र एक जंगल से गुजर रहे थे, तो डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया। ज्ञान ने डाकुओं को समझाना चाहा, लेकिन उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। धन से भी सब कुछ छीन लिया गया। तब विश्वास आगे आया। उसने कहा कि आपने हमारा सब कुछ छीन लिया है, लेकिन एक बात याद रखना, अगर विश्वास टूट जाए, तो दोबारा कायम नहीं हो सकता है। डाकुओं पर विश्वास की बात का गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने तीन मित्रों को आजाद कर दिया और लूटा गया सामान भी वापस कर दिया।