Showing posts with label #शासक #चीन #राजपाट #राजकुमार. Show all posts
Showing posts with label #शासक #चीन #राजपाट #राजकुमार. Show all posts

Thursday, July 16, 2026

युवराज ने सीखी अनकहे को सुनने की कला

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अच्छा शासक वही है, जो अपनी प्रजा की परेशानियों को बिना कहे समझ जाए। जब कोई शासक अपने लोगों के दिल की बात सुनना सीख जाए, बिना उनके बोले, उनकी भावनाओं और जो दर्द बयाँ न किया गया हो उसे समझ ले, तो वह अच्छा शासक माना जाता है। प्रजा भी  अपने उसी राजा पर विश्वास करती है।  एक बार की बात है। चीन में एक राजा हुआ करता था। 

वह जब बूढ़ा हो चला, तो उसने सोचा कि अपने पुत्र को राजपाट सौंप देना चाहिए। लेकिन वह चाहता था कि उसका पुत्र एक अच्छा शासक बने। इसलिए वह अपने पुत्र को एक जेन के पास ले गया। जेन मास्टर वास्तव में बौद्ध धर्म की एक शाखा से जुड़े होते हैं, जो ध्यान लगाते हैं। जेन मास्टर ने राजकुमार को एक साल के लिए जंगल में भेज दिया। साल भर बाद जब राजकुमार लौटकर आया, तो जेन मास्टर ने पूछा कि तुम्हें जंगल में क्या सुनाई दिया। राजकुमार ने कहा कि मैंने कोयल को कूकते सुना। 

नदियों के बहते पानी की कल-कल ध्वनि सुनी। मेढकों का टर्राना सुना। भेड़ियों की आवाज सुनी। वह अपना अनुभव सुनाता चला गया। जेन मास्टर ने कहा कि तुम फिर एक साल के लिए जंगल में जाओ और कुछ नया सुनकर आओ। राजकुमार अब अपने घर लौटना चाहता था, लेकिन बेमन से वह एक बार फिर जंगल गया। शुरुआत में तो उसे कुछ नया नहीं सुनाई दिया। लेकिन जब उसने ध्यान लगाना सीख लिया, तो उसे बहुत कुछ सुनाई देने लगा। 

वह लौटकर आया और जेन मास्टर से कहा कि इस बार मैंने तितलियों की बातें सुनीं, कलियों का चटकना सुना, सूरज की किरणों को धरती पर उतरना सुना। जेन मास्टर ने कहा कि अब तुम राजा बनने के लायक हो गए हो। जो राजा  अनसुने को सुन लेता हो, वही अच्छा शासक हो सकता है।