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Friday, July 17, 2026

‘हरित विकास’ का नया मॉडल बनकर उभरेगा हरियाणा


अशोक मिश्र

हरियाणा आज हरित विकास का एक ऐसा इतिहास रचने जा रहा है, जो पूरे देश को एक नई दिशा और दशा प्रदान करने वाला है। हाइड्रोजन  ट्रेन के संचालन से उपलब्धि की एक नई ऊंचाई छूने वाला हरियाणा अब केवल कृषि और उद्योग का प्रदेश नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे हरित विकास का मॉडल भी बन रहा है। जब विकास का रंग हरा होता है तो उसका असर सिर्फ  पर्यावरण पर नहीं, सीधे-सीधे युवाओं के रोजगार और जीवन पर भी पड़ता है। आने वाले कुछ वर्षों में हरियाणा में हरित अर्थव्यवस्था से लाखों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। बस जरूरत है कि युवाओं को हरित विकास के क्षेत्र में रोजगार हासिल करने योग्य बनाया जाए। 

उन्हें इस क्षेत्र में ट्रेनिंग दी जाए और कार्य कुशल बनाया जाए। 1.5 मेगावाट के इस प्लांट को चलाने, हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और सुरक्षा के लिए केमिकल इंजीनियर, तकनीशियन, आॅपरेटर और सुरक्षा कर्मियों की जरूरत पड़ेगी। जींद में देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट लग चुका है और जींद-सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज रवाना होगी। पीएम नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। हरियाणा के शहरों में हरित निर्माण एक नया उद्योग बनकर उभर रहा है।

 हरित विकास हरियाणा के लिए सिर्फ  पर्यावरण बचाने का जरिया नहीं है, यह रोजगार देने का इंजन भी है। अगर नीतियां सही दिशा में चलीं, निवेश समय पर हुआ और युवाओं को स्किल दी गई, उन्हें प्रशिक्षित किया गया तो हरियाणा न केवल प्रदूषण मुक्त बनेगा बल्कि रोजगार युक्त भी बनेगा। हरा प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश होगा और समृद्ध प्रदेश में हर हाथ को काम मिलेगा। हरित नौकरियों के लिए पारंपरिक डिग्री काफी नहीं होगी। सोलर पैनल लगाना, हाइड्रोजन फ्यूल सेल संभालना, ईवी की बैटरी ठीक करना, कार्बन आॅडिट करना, ये सब नई स्किल मांगते हैं। इसलिए आईटीआई, पॉलिटेक्निक और कौशल विश्वविद्यालयों में ग्रीन स्किल के कोर्स शुरू करने होंगे। 

सरकार और उद्योग मिलकर युवाओं को प्रशिक्षण दें तो पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार अकेले रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अगले पांच साल में हरियाणा में एक लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां बन सकती हैं। हालांकि यह भी सही है कि हाइड्रोजन काफी महंगी तकनीक है। शुरुआत में उद्योग लगाने पर ज्यादा निवेश करना होगा, यह भी सही है। इस क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े मानक हैं। सुरक्षा मानकों पर सरकार और उद्योगों को कड़ी नजर रखनी होगी। 

अगर कड़ाई से निगरानी नहीं की गई, तो किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन केवल आशंका के चलते इसे छोड़ा नहीं जा सकता है। अगर सरकार और निजी कंपनियां मिलकर प्लांट और डिपो का विस्तार नहीं करेंगी तो रोजगार सीमित रह जाएगा।