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Monday, July 13, 2026

हरित विकास की ओर हरियाणा ने बढ़ाए मजबूती से कदम


अशोक मिश्र

हरियाणा ने बड़ी मजबूती से हरित विकास की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि आगामी 17 जुलाई को हरियाणा देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने के मामले में गवाह बनने जा रहा है। यह ट्रेन जींद-सोनीपत रेलमार्ग पर चलाई जाएगी। यह डीजल के बजाय पानी और हाइड्रोजन से चलेगी जिससे प्रदूषण शून्य होगा यानी कार्बन का उत्सर्जन नहीं होगी। राज्य में जिस तरह सरकारी योजनाएं हरित विकास को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही हैं, उससे उम्मीद है कि निकट भविष्य में हरियाणा की तस्वीर बदलेगी। वैसे भी सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आने तक यह हरित प्रदेश ही था। कहा जाता है कि हरियाणा शब्द भी हरियाली से ही आया है। 

राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और सतत कृषि के लिए सौ करोड़ रुपये के ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड' की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य प्रदूषण को कम करना और प्राकृतिक संसाधनों को बचाना है। पिछले कुछ सालों में हरियाणा ने हरित विकास की दिशा में कई कदम उठाए हैं। आने वाले समय में इसी पर राज्य का भविष्य तय होगा। सबसे पहले सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हरियाणा ने रफ्तार पकड़ी है। सरकारी इमारतों की छतों पर सोलर पैनल लगना, गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट और किसानों के लिए सोलर पंप योजना से न सिर्फ बिजली की बचत हो रही है बल्कि डीजल पर निर्भरता भी कम हुई है। 

गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक बसें और ई-आॅटो को बढ़ावा देना वायु प्रदूषण घटाने की दिशा में छोटा पर जरूरी कदम है। भूजल स्तर गिरना हरियाणा की सबसे गंभीर समस्या है। इसे देखते हुए माइक्रो इरिगेशन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और तालाबों के पुनरुद्धार पर काम शुरू हुआ है। इतना ही नहीं, राज्य सरकार 'वन मित्र योजना' के तहत लोगों को पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए पैसे दे रही है। पूरे राज्य में पुराने पेड़ों की रक्षा के लिए 'प्राण वायु देवता पेंशन योजना' लागू है जिसमें 75 साल से पुराने पेड़ों का संरक्षण करने वालों को प्रतिवर्ष तीन हजार रुपये मिलते हैं। 

हरियाणा में वन क्षेत्र बढ़ाने का यह बहुत बढ़िया प्रयास है। बस, जरूरत इस बात की है कि पूरे राज्य में पेड़ों की अवैध कटाई को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया जाए। सरकार वन क्षेत्र बढ़ाने का जितना प्रयास करती है, वन माफिया उतनी ही तेजी के साथ वनों की अवैध कटाई करके सरकार के प्रयासों पर पानी फेर देते हैं। अगर गांव-गांव में जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और सौर ऊर्जा को जन आंदोलन बनाया जाए तो बदलाव जमीनी स्तर पर दिखेगा। हरित विकास का मतलब विकास रोकना नहीं है। इसका मतलब है ऐसा विकास जो अगली पीढ़ी के लिए हवा, पानी और खेती की जमीन बचा कर रखे। उन्हें स्वस्थ जीवन दे।