अशोक मिश्र
हरियाणा सरकार ने फैसला किया है कि मिलावट करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। शरदकालीन तीज-त्यौहार भी नजदीक आ रहे हैं। पितृपक्ष, नवरात्र, दशहरा, दीपावली जैसे त्यौहार नजदीक ही हैं। इन त्यौहारों पर खाद्य पदार्थों और मिठाइयों की मांग काफी बढ़ जाती है। बाजार में मिठाई, दूध-पनीर, घी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी मौके का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। ऊंची मांग और जल्दी बिक्री का दबाव उन्हें सस्ते विकल्प अपनाने का प्रलोभन देता है।हरियाणा सरकार ने इस खतरे को भांपते हुए खाद्य विभाग की टीमों के साथ पुलिस की मदद से विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। चंडीगढ़ में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में तय किया गया है कि त्यौहारी सीजन से पहले खाद्य पदार्थों की जांच और नमूना लेने की कार्रवाई तेज की जाएगी और इस बार अकेले खाद्य विभाग नहीं बल्कि पुलिस की टीमें भी साथ रहेंगी। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है क्योंकि पहले अक्सर व्यापारी सैंपल लेने आई टीमों से उलझ जाते थे या दबाव बनाकर कार्रवाई को टाल देते थे।
पुलिस की मौजूदगी से औचक निरीक्षण को बल मिलेगा। हर साल ऐसे अभियान चलने के बावजूद मिलावट नहीं रुकने का कारण अर्थशास्त्र है। दशहरा, नवरात्र और दीपावली पर खोया, पनीर, घी और मिठाइयों की मांग इतनी अधिक हो जाती है कि वैध आपूर्ति कम पड़ जाती है। मांग और आपूर्ति के इस अंतर को पाटने के लिए नकली और सस्ता माल खपाया जाता है। इसके अलावा राज्य में जांच और दंड की प्रक्रिया काफी धीमी है। पहले सैंपल की रिपोर्ट आने में बीस दिन से अधिक लगते हैं और कई जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद तक खाली रहता है। इस बार तुलनात्मक रूप से सरकार की कार्रवाई अधिक आक्रामक दिख रही है।
पिछले वित्त वर्ष में ही मिलावट के मामलों में 2.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और 265 मामलों में दोषसिद्धि हुई है। इस साल रणनीति असुरक्षित खाद्य की शीघ्र पहचान, लैब जांच को मजबूत करना और फील्ड निरीक्षण को प्रभावी बनाने पर केंद्रित है। जिलों में सीएम फ्लाइंग के साथ संयुक्त रेड, गोदामों पर छापे और खराब तेल को मौके पर नष्ट करने जैसी कार्रवाई इसी का हिस्सा हैं।
फरीदाबाद, गुरुग्राम जैसे शहरी जिलों में जहां मिठाई की बड़ी फैक्टरियां हैं, वहां वेयरहाउस स्तर पर ही निगरानी शुरू कर दी गई है। कुल मिलाकर, त्योहारों का मौसम स्वास्थ्य के लिए चुनौती भरा है, लेकिन सरकार की बढ़ती सख्ती, आधुनिक जांच सुविधाएं और पुलिस सहयोग से स्थिति में सुधार की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहना होगा, प्रमाणित और पैक किए हुए उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी तथा संदेह होने पर विभाग को सूचित करना होगा। मिलावट रोकना केवल प्रशासन का काम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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