अशोक मिश्र
पूरे देश में मानसून सक्रिय हो गया है। हरियाणा में भी लगभग सभी जिलों में बरसात हो रही है। भारी बरसात की वजह से कहीं पेड़ गिर रहे हैं, तो कहीं सड़कें धंस रही हैं। नालियां जाम होने की वजह से शहरों की गलियों में पानी जमा हुआ है। सड़कों पर बने गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत साबित हो रहे हैं। हरियाणा में इस बार भी सड़कें बह गईं, गलियां तालाब बन गईं और गड्ढों में पानी भरकर लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो गईं। गुरुग्राम से लेकर करनाल, फरीदाबाद से हिसार और रोहतक से अंबाला तक हालात एक जैसे हैं।भारी बरसात के कारण फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल, सोनीपत और भिवानी जैसे जिलों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। लोगों को आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों में फरीदाबाद में खेड़ी पुल धंसने से ट्रैफिक वन-वे करना पड़ा, गुरुग्राम में नरसिंहपुर के पास नेशनल हाईवे-48 धंस गया। इन सभी जिलों के निचले इलाकों और अंडरपास में भारी जलभराव हुआ है। पलवल में लगातार बारिश से सड़कें जलमग्न होने की खबर है जिसकी वजह से मुख्य मार्गों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखा गया।
सोनीपत के रोहट में प्राइमरी हेल्थ सेंटर की बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई। यहां पर सड़कें तालाब बन गईं। ऐसी हालत में लोगों का आवागमन बाधित हो रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए जलभराव वाली सड़कें मुसीबत का कारण बन रही हैं। ऐसी स्थिति में सड़कों के किनारे खुले मैनहोल हादसे को न्यौता दे रहे हैं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में तो हालात शहरों से भी ज्यादा खराब हैं। गांव के कच्चे रास्ते कीचड़ से भरे हुए हैं। कीचड़ भरे रास्तों में आना-जाना काफी मुश्किल है।
इन्हीं रास्तों से होकर दोपहिया और चारपहिया वाहन आ जा रहे हैं। इन्हीं रास्तों से होकर बच्चों को स्कूल आना-जाना पड़ रहा है। सब्जी और अन्य सामान बेचने वाले लोगों को भी इन्हीं रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। सिरसा, भिवानी, जींद जैसे जिलों में ग्रामीण सड़कों की हालत इतनी खराब है कि एंबुलेंस तक समय पर नहीं पहुंच पाती है। गांवों और शहरों में जलभराव की वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे में डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जैसे रोगों के फलाने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर साल बरसात से पहले करोड़ों रुपये सड़कों और नालियों की सफाई पर खर्च होने के दावे किए जाते हैं, फिर नतीजा वही क्यों रहता है। हर बार ऐसा क्यों महसूस होता है कि योजना कागजों तक सीमित रह जाती है। फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते जिलों में शहरीकरण की रफ्तार के साथ बुनियादी सुविधाएं नहीं बढ़ीं। कई शहरों में पानी निकलने की जगहें बंद कर दी गईं, निचले इलाकों में कॉलोनियां बन गईं और नतीजा यह कि थोड़ी सी बारिश में ही घरों में पानी घुस जाता है।
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