बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
कभी अमर शहीद राजगुरु के साथी रहे बाबा आमटे अहिंसावादी महात्मा गांधी और विनोबा भावे से काफी प्रभावित रहे। महात्मा गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने अपने को क्रांतिकारी आंदोलन से अलग कर लिया था और पूरी तरह अहिंसा के मार्ग पर चल पड़े थे। बाबा आमटे का पूरा नाम मुरलीधर देवीदास आमटे था। इनका जन्म 26 दिसंबर 1914 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में हुआ था।इनके उनके पिता देवीदास हरबाजी आमटे शासकीय सेवा में लेखपाल थे। बरोड़ा से पाँच-छ: मील दूर गोरजे गांव में उनकी जमींदारी थी। उनका बचपन बहुत ही ठाट-बाट से बीता। यह भी कहा जा सकता है कि बाबा आमटे चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए थे। लेकिन एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद जब कर्मक्षेत्र में उतरे, तो उन्होंने गरीबों की सहायता, कुष्ठ रोगियों का इलाज ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
कहते हैं कि एक बार बाबा आमटे कहीं जा रहे थे। उन्होंने देखा कि सड़क के किनारे कुष्ठ रोग से ग्रसित तुलसीदास पड़े हुए हैं। पहले तो वह भी आगे बढ़ गए, लेकिन उन्होंने फिर सोचा कि यदि तुलसी दास की जगह वह होते, तो क्या होता? बस, वह लौटकर तुलसीदास के पास आए और उन्होंने उन्हें उठाया। उसकी सेवा की। इस घटना के बाद उन्होंने कुष्ठ रोगियों की सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में उन्होंने आनंदवन नाम से कुष्ठ रोगियों के लिए एक आश्रम खोला। शुरुआत में इस आश्रम में सात कुष्ठ रोगी थे। आज 180 हेक्टेयर जमीन पर फैला आनन्दवन अपनी आवश्यकता की हर वस्तु स्वयं पैदा कर रहा है। 9 फरवरी 2008 में 94 वर्ष की आयु में बाबा आमटे ने संसार से विदा ली।
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