Tuesday, April 14, 2026

बढ़ती गर्मी में लापरवाही से खेतों में आग लगने की घटनाएं चिंताजनक

अशोक मिश्र

बैसाख महीने की शुरुआत हो चुकी है। प्रचंड गर्मी के दिनों की कुछ दिन पहले ही शुरुआत हो चुकी थी। यह सही है कि अप्रैल महीने में इस बार छिटपुट बरसात होती रही। इसकी वजह से किसानों को अपनी फसलों को लेकर परेशानी उठानी पड़ी। उत्तर भारत में गेहंू की कटाई भी कहीं-कहीं शुरू हो चुकी है। हरियाणा में भी गेहूं और अन्य फसलें मंडियों में पहुंचने लगी हैं। किसान अपनी मेहनत का नकदीकरण करके खुश है। 

हरियाणा में पहली अप्रैल से ही मंडियों में अनाजों की खरीद शुरू हो चुकी है। यह बात अलग है कि कहीं कहीं मंडियों में अव्यवस्था की शिकायत किसान कर चुके हैं। इसके बावजूद संतोष की बात यह है कि अब धीरे-धीरे ही सही मंडियों में अनाज की खरीद रफ्तार पकड़ रही है। पिछले कई सालों पर नजर डालें तो गर्मी के दिनों में खड़ी फसलों और फसल अवशेषों में आग लगने की घटनाएं देखने को मिलती रही है। 

आज ही फतेहाबाद जिले में रतिया के लाली गांव में खेत में आग लगने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बता दे कि करीब साढ़े तीन एकड़ खड़ी गेहूं की फसल और आठ एकड़ क्षेत्र में फैला भूसा जलकर राख हो गया। यह आग तुड़ी मशीन से निकली चिंगारी के कारण लगी, जिसने देखते ही देखते बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। शुक्रवार को ही पलवल जिले के होडल क्षेत्र में बिजली के शॉर्ट सर्किट से गेहूं की फसल में भीषण आग लग गई। 

गौढोता-बेढ़ा सड़क मार्ग पर जोरोली वाले जंगल में एक ट्रांसफार्मर से निकली चिंगारी से खेतों में खड़ी 30 एकड़ गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई। ऐसी घटनाओं को थोड़ी सी सावधानी बरतकर होने रोका जा सकता है। खेत या जहां पर अनाज या फसलों के अवशेष रखे हों, उस जगह बीड़ी, सिगरेट पीने से परहेज करने के साथ-साथ ज्वलनशील पदार्थों को हटा देना चाहिए। 

यदि किसी मशीन को चलाने से चिन्गारी निकल रही हो, तो तुरंत मशीन को बंद करके उसे ठीक करानी चाहिए। पिछले कई दशकों से हर साल खेतों में खड़ी फसलों में आग लगने की घटनाएं होती रही हैं। कई बार इसके लिए इंसानी भूल जिम्मेदार होती है, तो कई बार ऐसे कारणों से आग लग जाती है जिसको रोकने में इंसान का कोई वश नहीं होता है। 

लेकिन कुछ मामलों में तो यह भी देखने में आता है कि किसान रबी और खरीफ फसलों के अवशेष को खेत में आग लगा  देते हैं। धान की पराली को जलाने की घटनाएं भी सीजन में बहुत देखने को मिलती हैं, तो आजकल के मौसम में किसान गेहूं के अवशेष यानी भूसे को सहेजने की जगह आग लगा देना बेहतर समझते हैं। यह पूरी तरह गलत है। भूसे का कई तरह से उपयोग किया जा सकता है। भूसे को बेचकर किसान कमाई कर सकता है। हालांकि ऐसा बहुत कम किसान करते हैं, लेकिन इस पर भी रोक लगनी चाहिए।

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