| प्रतीकात्मक चित्र |
अशोक मिश्र
बिना किसी की परेशानी को जाने समझे उसे कोसना, कतई उचित नहीं है। कुछ लोग संकट आने पर बहुत ज्यादा अधीर हो जाते हैं। वह यह नहीं सोच पाते हैं कि दूसरा व्यक्ति भी उनसे कहीं ज्यादा संकट में हो सकता है। कुछ लोग तो सामने वाले व्यक्ति के कपड़ों, उसकी सामाजिक स्थिति को देखते हुए आकलन करने लगते हैं।एक बार की बात है। एक अमीर आदमी का बेटा बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया। उसे तत्काल सर्जरी की जरूरत थी। उस अस्पताल में एक बहुत ही काबिल डॉक्टर था, लेकिन वह उस समय अस्पताल में उपलब्ध नहीं था। अमीर आदमी ने अस्पताल प्रबंधन पर लगभग चीखते हुए कहा कि उस डॉक्टर को बुलाओ। जल्दी से जल्दी बुलाओ।
अस्पताल प्रबंधन कहता रहा कि डॉक्टर को फोन कर दिया गया है। वह आते ही होंगे। थोड़ी देर बाद एक डॉक्टर हड़बड़ाते हुए आया। अमीर आदमी उस पर बरस पड़ा। तुम कितने लापरवाह डॉक्टर हो। मेरा बेटा जिंदगी और मौत से लड़ रहा है और तुम इतनी देर करके आ रहे हो। डॉक्टर ने विनम्रता से कहा कि मैं काफी दूर था। इसलिए आने में समय लग गया।
अमीर आदमी ने कहा कि यदि तुम्हारा बेटा भी मर रहा होता, तो क्या तुम ऐसा ही करते। डॉक्टर उस आदमी को जवाब देने की जगह सर्जरी रूम में चला गया। दो घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और उस आदमी से कहा कि तुम्हारा बेटा अब ठीक है। बाकी बातें नर्स तुम्हें समझा देगी। इतना कहकर डॉक्टर चला गया। अमीर आदमी ने नर्स से कहा कि यह डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है?
नर्स ने कहा कि डॉक्टर के बेटे की कल मौत हो गई है। जब उन्हें फोन किया गया था, तब वह अपने बेटे का दाह संस्कार करने जा रहे थे। आपके बेटे की हालत जानकर उन्होंने अंतिम संस्कार रोक दिया था। अब वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने गए हैं। यह सुनकर अमीर आदमी लज्जित हो गया।
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